एमपी में IAS बनाम IAS: सीनियर के आदेश को जूनियर ने डाला रद्दी की टोकरी में, इकबाल सिंह बैंस के बेटे ने शासन को दिखाई आंख!
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक वरिष्ठ और एक कनिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच उपजा विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मामला पर्यावरण विभाग का है, जहां 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अशोक वर्णवाल के लिखित आदेश को 2013 बैच के आईएएस अमनवीर सिंह बैंस ने मानने से साफ इनकार कर दिया है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के बेटे अमनवीर सिंह बैंस वर्तमान में राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (सिया) के सदस्य सचिव हैं। पूरा विवाद 237 मामलों में जारी की गई 'डीम्ड अनुमतियों' को लेकर है, जिसे लेकर सिया के चेयरमैन पहले ही आपत्ति जता चुके हैं और यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
एसीएस अशोक वर्णवाल ने 27 फरवरी 2026 को एक आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए कहा था कि राज्य सरकार इन डीम्ड अनुमतियों को नियमानुसार मानती है और चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया है, इसलिए इन पर आगे की प्रक्रिया और टीओआर जारी करने की कार्रवाई की जाए। वर्णवाल ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा था कि काम रोकना अनुचित है। हालांकि, इस आदेश के जवाब में अमनवीर सिंह बैंस ने सिया की बैठक बुलाई और 17 अप्रैल 2026 को हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, इन प्रकरणों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अमनवीर सिंह बैंस ने शासन के निर्देशों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे। एक वरिष्ठतम अधिकारी के आदेश को जूनियर आईएएस द्वारा रद्दी की टोकरी में डालने की इस घटना ने प्रशासन में हलचल मचा दी है। एक तरफ जहां सरकार इन अनुमतियों को सही ठहरा रही है, वहीं सिया के अधिकारी इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का जोखिम मान रहे हैं। इस प्रशासनिक टकराव के बीच अब पर्यावरणीय हितों से जुड़े कुछ पक्षकारों ने सिया को भंग करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है, जिससे यह पूरा मामला आने वाले दिनों में और अधिक पेचीदा होने की संभावना है।

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