विदिशा/भोपाल:
मध्य प्रदेश की सियासत में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हत्या की साजिश का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ है। यह खुलासा किंसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि विदिशा के एक किसान गोविंद गुर्जर ने अपनी मौत से ठीक पहले एक वीडियो जारी कर किया है।
किसान का आरोप: 'शशांक भार्गव ने दी थी हत्या की सुपारी'
वायरल वीडियो में किसान गोविंद गुर्जर ने विदिशा के पूर्व विधायक शशांक भार्गव (जो हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं) पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि शशांक भार्गव ने उसे एक रिवॉल्वर थमाई थी और बदले में शिवराज सिंह चौहान और विदिशा विधायक मुकेश टंडन की हत्या करने का दबाव बनाया था।
किसान के मुताबिक, भार्गव ने कहा था कि जब वह इन दोनों को 'निपटा' देगा, तभी उसके मेहनत की फसल के बकाया पैसे चुकाए जाएंगे। किसान ने वीडियो में भावुक होते हुए कहा, "मैं शिवराज मामा के लिए जान दे सकता हूं, लेकिन उनकी जान ले नहीं सकता।"
वीडियो के बाद मौत: हत्या या आत्महत्या?
इस मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि 7 मिनट का यह वीडियो जारी करने के कुछ ही घंटों बाद किसान गोविंद गुर्जर का शव सुमेर और सोराई स्टेशन के बीच रेल की पटरी पर मिला। किसान का सिर धड़ से अलग था। वीडियो में किसान ने पहले ही आशंका जताई थी कि भार्गव के गुंडे उसे शाम तक मार डालेंगे और रेल की पटरी पर फेंक देंगे।
सुरक्षा एजेंसियों का 'अलर्ट' और अब यह घटना
हैरानी की बात यह है कि दिसंबर 2025 में ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर शिवराज सिंह चौहान की जान को खतरा बताया था, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। अब ठीक 4 महीने बाद इस वीडियो और किसान की मौत ने साजिश की कड़ियों को और उलझा दिया है।
सियासी घमासान: CBI जांच की मांग
इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में राजनीति गरमा गई है: शशांक भार्गव ने इन आरोपों को अपने खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस ने इस मामले की न्यायिक या CBI जांच की मांग करते हुए मोहन यादव सरकार को घेरा है। किसान के बेटे दीपक ने पिता के वीडियो को 100% सच बताते हुए कहा कि उनके पिता पर भार्गव के गुंडों का भारी दबाव था।
बड़े सवाल: क्या शशांक भार्गव को मिल रहा है 'संरक्षण'?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि अगर आरोपी नेता भाजपा में शामिल न हुआ होता, तो क्या अब तक पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं कर लिया होता? एक व्यक्ति मौत से पहले नाम लेकर आरोप लगा रहा है और फिर उसकी संदिग्ध मौत हो जाती है—यह मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे गंभीर आपराधिक-राजनीतिक मामला बनता जा रहा है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव और पुलिस प्रशासन पर हैं कि क्या इस मामले के लिए SIT का गठन होगा? क्या केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों का सच सामने आएगा?