विदिशा, भोपाल। 
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विदिशा की एक घटना का जिक्र करते हुए एक बार फिर मोहन सरकार पर निशाना साधा। जीतू पटवारी ने विदिशा की एक बच्ची का जिक्र करते हुए प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश की सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि विदिशा में सड़क किनारे कचरे के ढेर में कुछ बीनकर खाते हुए एक मासूम बच्ची की तस्वीर ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर ने प्रदेश में कुपोषण, गरीबी और सरकारी व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता को फिर से केंद्र में ला दिया है। यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की व्यवस्था, शासन और संवेदना की विफलता का प्रतीक है। दरअसल, एक दिन पहले ही जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर सड़क किनारे एक मासूम बच्ची कचरे में पड़ा बचा हुआ खाना खाती नजर आई। यह दृश्य न सिर्फ गरीबी की मार झेलते समाज की त्रासदी है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने सरकार के ‘सुखी समाज’ और ‘पोषण मिशन’ जैसे दावों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। 
मिड-डे मील की तस्वीर से स्तब्ध देश

जीतू ने कहा कि दो दिन पहले लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी जी ने जब देश के सामने मिड-डे मील की वह तस्वीर रखी, जिसमें बच्चों को कागज पर खाना परोसा जा रहा था, तब पूरा देश स्तब्ध रह गया। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और मध्य प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं की सच्चाई है। उन्होंने कहा कि सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश कुपोषण, मातृ मृत्यु, बाल मृत्यु और महिलाओं पर अत्याचार जैसे सूचकांकों में देश में शीर्ष पर है, जबकि मुख्यमंत्री प्रदेश की वास्तविक समस्याओं की बजाय राजनीतिक मंचों पर भाषण देने में व्यस्त हैं। यह सब केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश की आत्मा पर लगी चोटें हैं।
वास्तविक स्थिति पर कभी गहराई से नहीं झांकते सीएम
मुख्यमंत्री जी आप बिहार जाकर बड़े-बड़े भाषण देते हैं। राजनीतिक मंचों से दूसरों को नसीहत देते हैं, लेकिन अपने ही राज्य की वास्तविक स्थिति पर कभी गहराई से नहीं झांकते। मध्य प्रदेश की धरातल सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। गरीब भूखा है, किसान कर्ज़ में दबा है, युवा बेरोज़गारी से परेशान हैं और महिलाएं असुरक्षित हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि आपने “लाडली बहनों” से वादा किया था कि हर माह ₹3000 सहायता राशि दी जाएगी, लेकिन आज तक ₹1250 ही दे पाए हैं। प्रदेश का वित्तीय हाल ऐसा है कि राजकोषीय घाटा बढ़ता जा रहा है और विकास ठप पड़ा है। सरकारी योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीन पर जनता का दर्द बढ़ता जा रहा है।