ओबीसी आरक्षण निर्णायक मोड़ पर: सुप्रीम कोर्ट में आज से रोजाना सुनवाई, सरकार और ओबीसी महासभा की एकराय
भोपाल / नई दिल्ली।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण को टॉप ऑफ द बोर्ड श्रेणी में शामिल कर 24 सितंबर 2025 से दैनिक सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय होने तक यह सुनवाई लगातार जारी रहेगी। इस मामले में सरकार, ओबीसी महासभा और याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों के वकील एकजुट होकर कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेंगे। मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जिसे 2019 में अध्यादेश के माध्यम से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। हालांकि, मामला न्यायालय में लंबित होने से 13 प्रतिशत आरक्षण प्रभावी नहीं हो पाया है। यदि शीघ्र निर्णय आता है, तो इससे वे विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे जो इस अतिरिक्त कोटे में आते हैं और आयु सीमा पार कर चुके हैं। इससे पहले विधानसभा में हुई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने पर सहमति जताई थी। बैठक में यह संकल्प भी पारित हुआ कि अन्य पिछड़े वर्ग को उनका उचित हक दिलाने के लिए सभी दल एकजुट रहेंगे। बता दें, ओबीसी आरक्षण वृद्धि का प्रस्ताव पहली बार कमलनाथ सरकार ने पारित किया था। इसके बाद मामला अदालत में चला गया। अब सुप्रीम कोर्ट के दैनिक सुनवाई के निर्णय से उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह विवाद जल्द सुलझेगा और राज्य में आरक्षण व्यवस्था स्पष्ट हो जाएगी।

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