भाजपा के डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में कार्यकारिणी के गठन का इंतजार, गुटबाजी डाल रही अड़ंगा
भोपाल।
भारतीय जनता पार्टी के जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की कवायद अधर में अटकी हुई है। प्रदेश के लगभग तीन दर्जन से अधिक जिलों में अब तक जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। संगठन स्तर पर इस मामले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार दौरों और कार्यक्रमों के चलते पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और संगठन प्रभारी पिछले कुछ महीनों से बेहद व्यस्त रहा। यही कारण है कि जिलों की कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया लंबित हो गई। अब इसे लेकर जिला स्तर के नेता और कार्यकर्ता असमंजस में हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन जिलों में कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका है वहां स्थानीय स्तर पर नामों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। संगठनात्मक समीकरण और गुटबाजी भी देरी का बड़ा कारण मानी जा रही है।
अब तक किन जिलों में बनी कार्यकारिणी
भाजपा संगठन में लंबे समय बाद गुरुवार को खंडला जिले की कार्यकारिणी घोषित की। इसमें 11 जिला उपाध्यक्ष, 7 जिला मंत्री, एक-एक कोषाध्यक्ष, कार्यालय मंत्री और सह कार्यालय मंत्री समेत 21 पदाधिकारी बनाए गए है। वहीं, अब तक जिन जिलों में कार्यकारिणी का गठन किया जा चुका है उनमें आगर मालवा, बड़वानी, बुरहानपुर, भोपाल ग्रामीण, बैतूल, सीधी, मंडला, देवास, सागर, हरदा, मुरैना, दतिया, छतरपुर, झाबुआ, उज्जैन शहर, उज्जैन ग्रामीण, पन्ना, शिवपुरी और डिंडोरी शामिल हैं।
निगम-मंडल नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें
इसके अलावा मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से लंबित निगम-मंडल नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही है। सत्ता पक्ष के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि पितृपक्ष के बाद भाजपा संगठन और सरकार बड़े फैसले कर सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन की टीम इस दिशा में सक्रिय बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि नवरात्रि में संगठन और सरकार मिलकर नियुक्तियों और नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। बता दें, अभी मोहन कैबिनेट में चार मंत्रियों की जगह खाली है। फरवरी 2024 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक निगम-मंडल और आयोगों में किसी भी नेता को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। ऐसे में विभागों का पूरा बोझ मंत्री और प्रशासनिक अफसरों पर है। पार्टी के अंदर यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने लंबे इंतजार के बाद आखिर कब तक नियुक्तियों को टाला जाएगा।

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