भोपाल। 
भाजपा के आधार स्तम्भ एवं पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा जिनको भाजपा के पितृपुरूष भी कहा जाता है। मप्र भाजपा की नींव रखने वाले भाजपा के इस आधारस्तंभ के भतीजे सुरेंद्र पटवा ने इस जननेता का नाम मिटृटी में मिला दिया है। दरअसल सुंदरलाल पटवा की कोई संतान नहीं थीं तो उन्होंने अपने भतीजे सुरेंद्र पटवा को गोद लिया था और उनके अवसान के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को भी वे सुरेंद्र पटवा को सौंप गए थे। लेकिन सुरेंद्र पटवा अपनी सुदृढ़ विरासत को संभाल नहीं पाए और ​उस विरासत उस नाम को उन्होंने मिटृ​टी में मिला दिया। उनके नाम से गिरफतारी वारंट जारी हुआ है। उन पर तमाम सारे धोखाधड़ी के मामले दर्ज है। 100 से ज्यादा चेक बाउंस के मामले भी उन पर चल रहे हैं कई मामलों में तो उनको सजा भी हुई हैं अभी वह जमानत पर है। सुरेंद्र पटवा के खिलाफ CBI ने एफआईआर दर्ज कराई है. सुरेंद्र पटवा के SBI समेत कई बैंकों में फर्जी खातों की जानकारी के बाद 10 दिनों के भीतर दूसरी बार वारंट जारी हुआ है. इससे पहले 29 अगस्त 2025 को वारंट जारी हुआ था और 8 सितंबर को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वो पेश नहीं हुए. कोर्ट में पेश न होने पर 9 सितंबर 2025 को उनके खिलाफ फिर से वारंट जारी किया गया है. पटवा के खिलाफ लगभग 100 के करीब चेक बाउंस के मामले जिला कोर्ट में पेंडिंग हैं. चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुरेंद्र पटवा के खिलाफ 173 क्रिमिनल केस दर्ज हैं, जिनमें से 6 में तो कोर्ट ने दोषी भी माना है और ज्यादातर मामलों में 6 महीने की सजा भी सुनाई है. हालांकि, सभी मामले अभी भी कोर्ट में लंबित हैं, क्योंकि सुरेंद्र पटवा ने सभी फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की है. इससे पहले साल 2018 के एफिडेविट में सुरेंद्र पटवा ने अपने खिलाफ दर्ज 26 मामलों का जिक्र किया था।