जबलपुर। 
भोपाल के ऐशबाग एरिया में बने 90 डिग्री का फ्लाईओवर ब्रिज निर्माण के मामले में बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जब ठेकेदार ने लोक निर्माण विभाग के निर्देशों के अनुसार ही काम किया है, तो फिर उस पर कार्रवाई क्यों की गई? हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेव तथा जस्टिस विनय सराफ युगलपीठ के समक्ष बुधवार को मैनिट (MANIT) के प्रोफेसर की रिपोर्ट पेश की गई. रिपोर्ट में बताया गया कि निर्धारित नक्शे के अनुसार फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण 118 तथा 119 डिग्री के बीच है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी पक्षकारों को रिपोर्ट देने तथा अपलोड करने के आदेश दिए हैं.
ठेकेदार कंपनी को 2021-22 में मिला था ऐशबाग एरिया में फ्लाईओवर निर्माण का ठेका
कंपनी को ब्लैक लिस्ट किए जाने के खिलाफ ठेकेदार पुनीत चड्ढा की तरफ से याचिका दायर की गई थी. जिसमें कहा गया था कि ऐशबाग एरिया में फ्लाईओवर निर्माण का ठेके उनकी कंपनी को साल 2021-22 में मिला था. फ्लाईओवर का निर्माण 18 माह में किया जाना था. ब्रिज का जीएडी सरकारी एजेंसी के द्वारा जारी किया गया था. बाद में साल 2023 तथा 2024 में जीएडी में संशोधन किया गया. सरकारी एजेंसी के जरिए उन्होने ब्रिज का निर्माण किया था.
सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का किया था गठन
ब्रिज में 90 डिग्री का मोड़ होने के कारण दुर्घटना होने की आशंका के संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार ने जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. जांच कमेटी ने पाया कि ब्रिज के जिस हिस्से में मोड़ बना है, उसके नीचे से रेल पटरी निकल रही है. राज्य सरकार तथा रेल विभाग में सामंजस्य की कमी थी. इसके अलावा ब्रिज के खंभे को निर्धारित दूरी में नहीं लगाये गए हैं. जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई का मौके दिए बिना ही कंपनी को सरकार की तरफ से ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. याचिका में कहा गया था कि ब्रिज का मोड़ 90 डिग्री नहीं बल्कि 119 डिग्री है.
हाईकोर्ट ने MANIT के प्रोफेसर कराई ब्रिज की डिग्री की जांच
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नहीं की जाए. इसके साथ ही ब्रिज कितने डिग्री का बना है, MANIT के प्रोफेसर इसकी जांच करें और रिपोर्ट दें. याचिकाकर्ता जांच के लिए प्रोफेसर को फीस के रूप में एक लाख रुपये उपलब्ध कराए तथा नगर निगम भोपाल उपलब्ध कराए. याचिकाकर्ता का दावा सही पाये जाने पर वह फीस की राशि वसूलने का अधिकारी होगा.रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार कंपनी के खिलाफ की गई कार्यवाही को रद्द करने के लिए सरकार की तरफ से समय देने का आग्रह किया गया. युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए ये आदेश जारी किए. मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा तथा प्रवीण दुबे ने की.