एमपी कांग्रेस में महाघमासान: स्लीपर सेल, लात-घूंसे और बगावत! क्या पूरी तरह बिखर गई है पटवारी की कांग्रेस?
भोपाल।
मध्य प्रदेश कांग्रेस इस वक्त राजनीति के इतिहास के सबसे बुरे दौर और 'गृहयुद्ध' से गुजर रही है। अनुशासन का दम भरने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी मध्य प्रदेश में तमाशा बनकर रह गई है। एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी को संभालने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेताओं के बीच 'स्लीपर सेल' होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, बैठकों में लात-घूंसे चल रहे हैं और बड़े नेता सरेआम बगावत पर उतारू हैं। ऊपर से एकजुटता दिखाने के लिए जो 'डैमेज कंट्रोल' की नौटंकी की जा रही है, उसकी पोल खुद कांग्रेस के बड़े नेता खोल रहे हैं।
दिल्ली में 'वार', भोपाल में 'राहत': जीतू और दिग्विजय आमने-सामने
इस सियासी भूचाल की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर ₹500 करोड़ के जमीन घोटाले का गंभीर आरोप लगाया। लेकिन हैरान करने वाली बात तब हुई जब कांग्रेस के ही सबसे सीनियर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में बयान देकर पासा पलट दिया। दिग्विजय सिंह ने सरेआम कह दिया कि "इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।" जीतू पटवारी जिस मुख्यमंत्री को घेर रहे थे, दिग्विजय सिंह ने उन्हें क्लीन चिट दे दी। इसने साफ कर दिया कि संगठन और सीनियर नेताओं के बीच कोई तालमेल नहीं है।
'स्लीपर सेल' का जिन्न: कांग्रेस में छिपे हैं BJP के एजेंट?
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर 'गद्दारों' की खोज शुरू हो गई। पहले प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने देवास में कहा कि "संगठन के भीतर मौजूद 'स्लीपर सेल' (BJP के लिए काम करने वाले नेताओं) की पहचान कर उन्हें बाहर निकालना होगा।" इसके ठीक बाद भोपाल में हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की हाई-प्रोफाइल बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी यही बम फोड़ा। उन्होंने बिना नाम लिए साफ कहा कि पार्टी के भीतर भाजपा के स्लीपर सेल सक्रिय हैं। सियासी गलियारों में इसे सीधे दिग्विजय सिंह पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।
संवाद नहीं, अब सीधे लात-घूंसे: हिंसक हुई कांग्रेस की गुटबाजी
बात सिर्फ बयानों तक रहती तो ठीक था, लेकिन अब कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी आपस में भिड़ रहे हैं। राजधानी भोपाल में युवा कांग्रेस की बैठक चल रही थी, तभी पदाधिकारियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि सरेआम लात-घूंसे चल गए। प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया को बीच-बचाव करना पड़ा। उधर सीधी जिले में तो हद ही हो गई। सोशल मीडिया की एक पोस्ट से नाराज कांग्रेसियों ने अपनी ही पार्टी के जिला प्रभारी के साथ सरेआम मारपीट कर डाली। इस पर वरिष्ठ नेता अजय सिंह (राहुल भैया) को कड़ा रुख अपनाना पड़ा।
डैमेज कंट्रोल की 'फ्लॉप' कोशिश और अरुण यादव का 'ट्वीट बम'
जब बदनामी हद से ज्यादा बढ़ गई, तो दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने आनन-फानन में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। दोनों ने मुस्कुराते हुए कैमरों के सामने कहा कि "हम सब एक हैं, कांग्रेस में कोई मतभेद नहीं है।" लेकिन इस 'दिखावे की एकजुटता' की हवा महज कुछ घंटों में ही निकल गई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सीधे राहुल गांधी को टैग करते हुए एक ट्वीट बम फोड़ दिया। अरुण यादव ने लिखा कि "कुछ नेता जानबूझकर कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने की साजिश रच रहे हैं, इनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।"
बड़ा सवाल: अब क्या करेंगे राहुल गांधी?
दिखावे की एकता और पीठ पीछे छुरा घोंपने की यह राजनीति अब एमपी कांग्रेस को पूरी तरह खोखला कर चुकी है। कार्यकर्ताओं में निराशा है और आलाकमान खामोश है। सवाल यह है कि क्या जीतू पटवारी का अपनी ही पार्टी पर कोई कंट्रोल बचा है? और क्या दिल्ली में बैठे राहुल गांधी मध्य प्रदेश कांग्रेस के इस 'महा-विस्फोट' को रोक पाएंगे या फिर 2028 के चुनाव से पहले एमपी कांग्रेस पूरी तरह साफ हो जाएगी?

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