भोपाल।
मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन इस फैसले के बाद संगठन के भीतर उठती असहमति की आवाजें नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही हैं। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रख पाएगी या फिर क्रॉस वोटिंग का खतरा उसकी रणनीति पर भारी पड़ सकता है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने उम्मीदवार के चयन का खुलकर समर्थन किया है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह ने नटराजन को शुभकामनाएं देकर एकजुटता का संदेश दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विवाद तब और गहरा गया जब भोपाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया के जरिए उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी को इस निर्णय में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी क्योंकि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके बयान ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है। दरअसल, कांग्रेस की इस सीट को लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दावेदारी पेश की थी। दिग्विजय सिंह के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर नए चेहरे और वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधने की चुनौती खड़ी हो गई थी। सूत्रों के अनुसार, इस दौड़ में कमलनाथ समेत कई बड़े नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः हाईकमान ने मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताया। अब सभी की निगाहें शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक केवल औपचारिक समर्थन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पार्टी की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में विधायकों को एकजुट रखने, संभावित क्रॉस वोटिंग रोकने और राज्यसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप देने पर विशेष चर्चा होगी। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दो सीटों पर बीजेपी और एक सीट पर कांग्रेस का दावा मजबूत माना जा रहा है। ऐसे में परिणाम भले ही गणित के हिसाब से तय नजर आते हों, लेकिन कांग्रेस के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि असली चुनौती विपक्ष के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी कांग्रेस के लिए मजबूती का संदेश बनेगी या फिर अंदरूनी असंतोष नई मुश्किलें खड़ी करेगा।