भोपाल। 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के लाखों परिवारों को उनकी आबादी वाली जमीन के रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज देने और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को तैयार सिलाई की हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे के जरिए आबादी क्षेत्र में बसे लोगों की संपत्तियों का चिह्नांकन किया गया था। इसके बाद उन्हें स्वामित्व पत्र दिए गए थे। अब सरकार इन संपत्तियों की रजिस्ट्री कराकर पंजीकृत दस्तावेज भी उपलब्ध कराएगी। प्रदेश के 55 जिलों में 48.80 लाख निजी संपत्तियां और करीब 19 लाख सरकारी संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। रजिस्ट्री की प्रक्रिया में लगने वाला पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क सरकार स्वयं वहन करेगी। इस पर करीब 3800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि दस्तावेज मिलने के बाद लाभार्थियों को बैंक लोन सहित अन्य सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। मध्य प्रदेश ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।
अब तक खातों में भेजे जाते थे रुपए

कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को तैयार यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है। अभी तक विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 600 रुपए भेजे जाते थे, लेकिन शिकायतों के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत टेंडर के जरिए कपड़ा खरीदा जाएगा। विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म सिलवाकर उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इससे पहले साइकिल वितरण व्यवस्था में भी बदलाव कर चुकी है।

गेहूं खरीदी और यूसीसी पर भी चर्चा

बैठक में गेहूं खरीदी की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इस वर्ष देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदी मध्य प्रदेश में हुई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार ने बताया कि सुझाव लेने की प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।
27 विधायकों को किराए के मकान के लिए हम महीने मिलेंगे 40 हजार रुपए

भोपाल में पुराने विधायक विश्राम गृह परिसर के पारिवारिक खंड और विधायक विश्राम गृह खंड-1 को तोड़कर बहुमंजिला इमारत बनाई जा रही है। विधानसभा की संसदीय सुविधा समिति ने यहां रहने वाले विधायकों को निर्माण पूरा होने तक 40 हजार रुपए महीना किराए पर निजी मकान लेने की अनुशंसा की है। इसको आज कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई। इससे सरकार पर सालाना एक करोड़ 29 हजार रुपए का वित्तीय भार आएगा।