एमपी कैबिनेट में 'महा-सर्जरी' की तैयारी! जून में होगा मंत्रिमंडल विस्तार, कई मंत्रियों की छुट्टी; दिग्गज गोपाल भार्गव की वापसी के संकेत !
भोपाल।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल के बाद अब सरकार की टीम में बड़े फेरबदल और विस्तार के संकेत स्पष्ट रूप से नजर आने लगे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर समय-सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन पार्टी और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि जून या फिर विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले नया मंत्रिमंडल आकार ले सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित कुल 31 मंत्री सरकार में शामिल हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 सदस्य हो सकते हैं। इस लिहाज से अभी चार पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा चल रही है। संगठनात्मक और प्रशासनिक संतुलन साधने के उद्देश्य से कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी या विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। खासतौर पर आगामी “मिशन 2028” को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है। माना जा रहा है कि विंध्य, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल जैसे क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। पार्टी स्तर पर भी इस प्रक्रिया को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित वरिष्ठ नेतृत्व 17 मई को मंत्रियों के साथ अलग-अलग संवाद करेंगे। इस दौरान उनके कार्यकाल और प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस समीक्षा के आधार पर कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों की पहचान की जाएगी। पार्टी सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि कुछ ऐसे मंत्री, जो लगातार विवादों या असहज स्थितियों में सरकार के लिए चुनौती बने रहे हैं, उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी मुख्यमंत्री को आवश्यक संकेत दिए जाने की चर्चा है। इसी बीच सागर जिले की रहली विधानसभा से नौ बार से विधायक वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव का नाम एक बार फिर चर्चा में है। उन्हें संगठन और प्रशासन दोनों में अनुभवी चेहरा माना जा रहा है। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव, जमीनी पकड़ और संगठनात्मक समझ उन्हें मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण भूमिका के संभावित दावेदार के रूप में स्थापित करता है।कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिस पर पूरे राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।

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