भोपाल। 
मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक और क्रॉसिंग अब 'सुपरफास्ट' मौत के ठिकाने बनते जा रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट ने प्रदेश की रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे क्रॉसिंग हादसों के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में चौथे स्थान पर पहुँच गया है, जो बेहद शर्मनाक और डराने वाला आंकड़ा है।
लाशों के ढेर पर खड़ी व्यवस्था: 1 साल, 258 मौतें!
आंकड़े बताते हैं कि महज एक साल के भीतर प्रदेश में रेलवे हादसों ने 258 लोगों की जान ले ली। यानी हर दूसरे दिन कोई न कोई रेलवे ट्रैक पर दम तोड़ रहा है। 230 से ज्यादा लोग इन हादसों में गंभीर रूप से घायल होकर अपंग हो गए। मरने वालों में 28 महिलाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि रेलवे ट्रैक पार करना अब जान की बाजी लगाने जैसा हो गया है।
हादसों में 9% का उछाल: इंदौर और भोपाल बने 'डेंजर जोन'
साल 2023 में जहाँ 1300 हादसे हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1460 पहुँच गई। एक साल में हादसों में 9% की बढ़ोतरी प्रशासन के दावों की पोल खोलती है।

  •  इंदौर: सबसे ज्यादा 618 हादसों के साथ नंबर-1 पर।
  • भोपाल: राजधानी में 550 घटनाएं दर्ज की गईं।
  • जबलपुर: यहाँ भी 260 हादसों ने परिवारों को उजाड़ दिया।

शाम की 'जल्दबाजी' बन रही काल
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सबसे ज्यादा हादसे शाम 6 से 9 बजे के बीच हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दिनभर की थकान के बाद घर जल्दी पहुँचने की आपाधापी, बंद फाटक के नीचे से निकलने की 'बहादुरी' और मोबाइल-ईयरफोन का इस्तेमाल लोगों को मौत के करीब ले जा रहा है।
सिर्फ नियम नहीं, सख्ती की जरूरत!
NCRB की यह रिपोर्ट केवल आंकड़े नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन और आम जनता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। कई जगहों पर ओवरब्रिज और अंडरपास की कमी के कारण लोग ट्रैक पार करने को मजबूर हैं।  कान में ईयरफोन लगाकर ट्रैक पर चलना और बंद फाटक को पार करना आत्महत्या जैसा है। केवल रेलवे प्रशासन को कोसने से काम नहीं चलेगा। जब तक रेलवे क्रॉसिंग पर ऑटोमेटिक बैरियर, सीसीटीवी निगरानी और नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता, तब तक ये ट्रैक इसी तरह 'लाल' होते रहेंगे। अब फैसला आपको करना है— दो मिनट की जल्दबाजी या आपकी पूरी जिंदगी?