भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'स्मार्ट सिटी' के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी तंत्र की नींद और लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। महाराणा प्रताप के शौर्य और गाथा को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनाया गया 'महाराणा प्रताप लोक' पिछले डेढ़ साल से बनकर तैयार है, लेकिन विडंबना यह है कि सरकार इसका लोकार्पण करना ही भूल गई है।
₹9 करोड़ का 'लोक', पर जनता के लिए नो-एंट्री
राजधानी के टीटी नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर के सामने, लगभग एक एकड़ की बेशकीमती जमीन पर पर्यटन विकास निगम ने इस भव्य लोक का निर्माण किया है। खनिज रॉयल्टी के फंड से करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्मारक  डेढ़ साल से बनकर खड़ा है, लेकिन इसके गेट पर आज भी ताला लटका हुआ है।
ऐसा हैं महाराणा का लोक... 
शौर्य गाथा का प्रदर्शन: इस लोक में महाराणा प्रताप के जीवन, उनके युद्ध कौशल और साहस को पेंटिंग्स और प्रदर्शनियों के जरिए उकेरा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यहाँ मात्र 10 रुपये का टिकट भी रखा जाता, तो अब तक सरकार को लाखों रुपये का राजस्व मिल चुका होता और भोपाल के पर्यटन में एक नया अध्याय जुड़ता। पर्यटन निगम और जिला प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का नतीजा यह है कि करोड़ों की संपत्ति धूल फाँक रही है।
अधिकारियों का 'देखते हैं' वाला रवैया
वरिष्ठ पत्रकार सबकी खबर ने जब इस मुद्दे पर पर्यटन विकास निगम के एमडी और तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह (जो वर्तमान में मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ हैं) से बात की, तो अधिकारियों का जवाब रटा-रटाया था— "हम दिखवाते हैं कि लोकार्पण में देरी क्यों हुई।" सवाल यह उठता है कि क्या करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद लोकार्पण के लिए किसी 'शुभ मुहूर्त' का डेढ़ साल से इंतजार हो रहा है?
सरकार 'महाकाल लोक' और 'देवी लोक' जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स तो बना रही है, लेकिन बने हुए स्मारकों के सुचारू संचालन के लिए कोई मैकेनिज्म नहीं है। यह न केवल महाराणा प्रताप के शौर्य का अनादर है, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी भी है।
उम्मीद है कि इस खुलासे के बाद भोपाल प्रशासन और पर्यटन विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जगेगा और जल्द से जल्द इस 'लोक' के द्वार आम जनता के लिए खोले जाएंगे, ताकि लोग अपने महान नायक के इतिहास से रूबरू हो सकें।