एमपी में यूसीसी की दस्तक: मोहन सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी, जस्टिस रंजना देसाई करेंगी अगुवाई
भोपाल।
मध्य प्रदेश में भी देश के गुजरात और उत्तराखंड सहित अन्य प्रदेशों की तरह एक समान नागरिक संहिता (यूससी) लागू करने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। मोहन सरकार ने इसके लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को बनाया गया है। समिति में सदस्यों और सदस्य सचिव की नियुक्ति भी की गई है। कमेटी आगामी 60 दिन में रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
मध्य प्रदेश सरकार के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने आदेश जारी कर यूसीसी ड्राफ्ट तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई को अध्यक्ष, सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघन सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिह को सदस्य बनाया गया है। वहीं अपर सचिव अजय कटेसरिया सदस्य सचिव रहेंगे।
इसे औपचारिक शुरूआत मान सकते हैं
यूसीसी के लिए एमपी में हाई लेवल कमेटी गठित
- सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड न्यायाधीश होंगी अध्यक्ष
- 5 सदस्यीय कमेटी में विशेषज्ञ भी शामिल
- 60 दिन में कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी
- कमेटी विभिन्न कानूनों की समीक्षा करेगी
संवेदनशील मुद्दों की समीक्षा भी रिपोर्ट में शामिल होगी
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनी उच्च स्तरीय समिति सिर्फ कानूनी बदलाव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका प्रमुख फोकस महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करना होगा। सरकार ने पांच सदस्यीय इस समिति का गठन कर इसे 60 दिनों में ठोस सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे संवेदनशील मुद्दों की समीक्षा करेगी। खास बात यह है कि समिति लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों और उनके सामाजिक-कानूनी प्रभावों पर भी विचार करेगी, जो अब तक राज्य स्तर पर कम चर्चा में रहे हैं।
कमेटी सभी से सुझाव लेगी, परामर्श बैठकें भी होंगी
सरकार ने इस प्रक्रिया को ज्यादा समावेशी बनाने के संकेत दिए हैं। समिति आम लोगों, धार्मिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों से सुझाव लेगी, ताकि प्रस्तावित कानून व्यावहारिक और संतुलित हो सके। इसके लिए प्रदेशभर में परामर्श बैठकों की भी योजना बनाई जा रही है।
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन भी किया जाएगा
सूत्रों के मुताबिक, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर मध्य प्रदेश के सामाजिक ढांचे के अनुरूप ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। यह पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि UCC को लेकर देशभर में बहस तेज है और ऐसे में मध्य प्रदेश का कदम अन्य राज्यों के लिए भी दिशा तय कर सकता है। अगर तय समयसीमा में रिपोर्ट आती है, तो आने वाले महीनों में प्रदेश में UCC को लेकर ठोस विधायी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

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