कैबिनेट में सुगम परिवहन सेवा को मंजूरी संभव
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जल गंगा संवर्धन, गेहूं खरीदी और स्कूलों में एडमिशन के लिए मिलेगा मंत्रियों को निर्देश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हो रही है। मध्यप्रदेश में बीस साल बाद राज्य परिवहन सेवा की तर्ज पर 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' को मंजूरी मिल सकती है। इस बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान, गेहूं खरीदी और स्कूलों में प्रवेशोत्सव को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में लगातार निगरानी रखने और कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दे सकते हैं। कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के स्वत्वों से जुड़े मुद्दों को भी मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को प्रदेश के ग्रामीण, शहरी और इंटरसिटी परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और इसे मंत्रिपरिषद की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। माना जा रहा है कि आज कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल जाएगी।
इस पर होगा फोकस
- 2003 में राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद शुरू की जा रही इस नई सेवा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर प्रदेश के सभी आदिवासी इलाकों में, सुगम यात्री परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार हर आवश्यक प्रयास करेगी।
- मुख्यमंत्री ने यात्री परिवहन की भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना के सभी पक्षों का गंभीरता से अध्ययन करने को कहा है।
- नई परिवहन योजना में प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनिटरिंग की जाएगी:
- इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी।
- सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाई जाएंगी।
- सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समितियाँ गठित की जाएंगी, जो यात्री परिवहन को बेहतर बनाने, किराया तय करने, रूट चार्ट तैयार करने और योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए समन्वय और मार्गदर्शन करेंगी।
- आय के स्रोत निर्माण के लिए सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
- सरकार अनुबंधित बसों को प्राथमिकता से परमिट देगी, जबकि बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का ही रहेगा।
- यात्रियों और बस ऑपरेटर्स के लिए एक ऐप और कंपनी की मॉनिटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा।
- प्रदेश के सात बड़े संभागों में यात्री बसों की आवश्यकता और उनकी संख्या का निर्धारण करने के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
- बस ऑपरेटर्स को भी निरंतर व्यवसाय और अनुकूल परिवेश देने का प्रावधान किया गया है, जिससे उनकी सेवाएं बाधित न हों और यात्रियों को भी कोई असुविधा न हो।

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