यह खबर आपकी सावधानी के लिए है... मीडिया कर्मी—रंगकर्मी के नाम पर 42 करोड का फर्जी लेनदेन
भोपाल।
मीडिया काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, एक वरिष्ठ रंगकर्मी जो अब दिल्ली निवासी हैं। रहने वाले तो मध्य प्रदेश के हैं आलोक शुक्ला लेकिन अब वह दिल्ली में रहते हैं। बीच में अस्वस्थ हो गए थे और कई लोगों ने उन्हें मदद करने की पेशकश की थ्री उन्होंने अपने डॉक्यूमेंट अकाउंट नंबर, पैन नंबर, आधार नंबर कई लोगों को उपलब्ध कराए थे। उनके परिवार जनों ने। उस समय आलोक इस स्थिति में नहीं थे कि वह ठीक से सोच समझ सके, लोगों से चर्चा कर सके, संवाद कर सकें। डॉक्यूमेंट देना कितना जोखिम भरा हो सकता है। एक छोटी सी लापरवाही आपको किस परेशानी मे डाल सकती हैं यह आलोक के एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है। दरअसल आलोक जब अपने बीमारी के एक कठिन दौर से गुजर रहे थे उस समय समय उन्होंने मदद के लिए अपने डॉक्यूमेंट जैसे आधार कार्ड पैन कार्ड इनका कई जगह उपयोग भी किया था। अभी हाल ही में जब आलोक स्वस्थ हुए और उनको उनके सीए ने बडी ही चौंकाने वाली खबर सुनाई उनके पैन कार्ड का उपयोग करते हुए मुंबई एक कंपनी खोली गई और उसी पैन कार्ड के आधार पर जीएसटी नंबर भी लिया गया और उस कंपनी ने कंपनी का नाम अक्षत हैं। कंपनी ने 64 करोड का लेन देन भी कर लिया। अब यहां सोचने वाली और समझने वाली बात यह है कि फोन नंबर पर ओटीपी आया गया होगा। तो इसका भी तोड़ कर लिया गया था आलोक का नंबर अपडेट कर लिया गया था साथ ही ईमेल आईडी भी किसी पुलकित नाम के व्यक्ति के नाम से जनरेट की गई थी। यह कैसे हो गया?
यह समझ से परे है। किस तरीके से सरकार यह व्यवस्था काम कर रही है? किसी भी मेल किसी भी पैन कार्ड के आधार कार्ड के आधार पर कोई भी किस तरीके से कोई कुछ कर सकता है। अगर कुछ है तो उसमें फोन नंबर होता है। तो मेरे जानकारी आनी चाहिए। लेकिन नहीं। अंधेरे में सब हो गया। इस संबंध में जैसा आलोक ने बताया कि मैं एफआईआर कराने गया। मैंने शिकायत की हुई है और अब मेरा यह है कि मुझे एग्रीमेंट बनाकर इनकम टैक्स को देना पड़ेगा कि भाई नहीं मैंने यह काम नहीं किया तो एग्रीमेंट अभी सीए मेरे बनवा रहे
हैं। तो मैं आप आप सबको सूचित कर रहा हूं और सावधानी बरतने की कह रहा हूं कि इस तरह की घटनाएं अगर मेरे साथ भी हुई है तो निश्चित रूप से किसी और के साथ भी हो रही होंगी और इस तरह के किसी भी ट्रांजैक्शन किसी कंपनी से मेरा कोई लेना देना नहीं है। मैं नहीं जानता हूं ना इस चीज की मेरी कोई जिम्मेदारी है। तो आपने सुना कि आलोक शुक्ला बता रहे हैं कि उन्हें अचानक उनके सीए ने बताया जब वह रिटर्न भरने गए कि उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल करके कंपनी बना ली गई है जिसका नाम अक्षत है और उस कंपनी में तकरीबन 42 करोड़ का लेनदेन हुआ है। तो यह आलोक के लिए परेशानी की बात है। उन्होंने पुलिस में भी कंप्लेंट कर दी है और पुलिस के माध्यम से अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और संबंधित डिपार्टमेंटों को सूचना दी जाएगी और इस पर कारवाई शुरू की जाएगी। यह एक जनसरोकार से जुड़ी हुई खबर हैं। सबकी खबर का उददेश्य निष्पक्ष पत्रकारिता के अलावा जनहित और जनसरोकार की खबरों से भी होता हैं चूंकि आलोक प्रदेश की ही माटी के युवा पत्रकार एक अच्छे रंगकर्मी हैं उनके साथ इस तरह की एक तरह से धोखाधडी ही कही जा सकती हैं तो हमें इस खबर से और आलोक से सबक लेने की जरूरत हैं। अपने जरूरी डॉक्यूमेंन्टस जैसे आधार पैन कार्ड बैंक खाता नंबर यह सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर साझा करने से बचना चाहिए।

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