मध्य प्रदेश सरकार दूसरे राज्यों से खरीदेगी विंड एनर्जी, उपभोक्ताओं की जेब पर होगा असर
भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार ने स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ बिजली की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. ग्रीन एनर्जी ऑक्शन के तहत अब राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों से भी विंड एनर्जी खरीदी जाएगी. इस बिजली के लिए मध्य प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ 25 साल के लिए अनुबंध करेगी. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा करने से कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता घटेगी, बिजली कंपनियों की लागत कम होगी और उपभोक्ताओं को स्थिर दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी.
1600 मेगावाट तक खरीदी जाएगी बिजली
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने विंड पावर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पहले चरण में 800 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी, लेकिन मांग और शर्तें अनुकूल रहीं तो यह क्षमता बढ़ाकर 1600 मेगावाट तक की जा सकती है. यह बिजली 25 साल के लिए बोली प्रक्रिया के माध्यम से खरीदी जाएगी. ऐसी परियोजनाएं देश के किसी भी राज्य में स्थापित हो सकती हैं.
इन राज्यों से खरीदी जाएगी ग्रीन एनर्जी
बीते दो वर्षों में प्रदेश में 2702 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ा है. इसमें 1835 मेगावाट सौर ऊर्जा और 647 मेगावाट पवन व अन्य नवीकरणीय स्रोतों से शामिल हैं. गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में तेज और स्थिर हवाओं के प्रवाह की वजह से विंड एनर्जी प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं. इन्हीं राज्यों से बिजली खरीदना प्रदेश के लिए लागत की दृष्टि से फायदेमंद माना जा रहा है.
उपभोक्ताओं को सस्ती मिलेगी बिजली
ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. नरेश सिंह गहरवार ने बताया कि "वर्तमान दौरे में विंड एनर्जी सस्ती और कम प्रदूषण उत्पन्न करने वाली बिजली है. इसके बढ़ने से कोयला आधारित बिजली की आवश्यकता घटेगी. इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बिजली कंपनियों के घाटे में भी कमी आएगी. डॉ. सिंह ने बताया कि कोयला आधारित बिजली काफी मंहगी पड़ती है, जिसके कारण बिजली कंपनियों को अधिक टैरिफ लगाना पड़ता है, लेकिन विंड एनर्जी के प्रयोग से उपभोक्ताओं पर टैरिफ का बोझ भी घटेगा."

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