“अगर शिंदे शिवसेना के लिए जयचंद न होते तो…”, संजय राउत का डिप्टी CM पर तीखा हमला
मुंबई. बीएमसी (BMC) सहित महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के नतीजे अब साफ हो चुके हैं. यहां बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) (एकनाथ शिंदे) की महायुती ने राज्य की 29 में 23 नगर पालिकाओं में प्रचंड जीत हासिल की है. वहीं बीएमसी चुनाव में महायुति ने कुल 227 में से 118 सीटें अपने नाम कर लिए हैं. मुंबई महानगर निगम में भाजपा और शिवसेना की बढ़त ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, जहां 28 साल से चली रही ठाकरे परिवार की धाक पर गहरा धक्का लगा. हालांकि शाम होते-होते चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल गए. जहां पहले यह माना जा रहा था कि बीएमसी में बीजेपी के नेतृत्व में महायुति प्रचंड जीत हासिल कर लेगी, लेकिन अंतिम नतीजों में उसे बहुमत से केवल 4 सीटें ज्यादा मिली हैं. इसमें बीजेपी ने 89, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें मिलीं.
मुंबई नगर निगम चुनाव में कई सीटों पर कांग्रेस ने शिंदे सेना को करारा झटका दिया है. यहां 24 सीटें जीतकर कांग्रेस चौथी बड़ी पार्टी बनी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर उद्धव ठाकरे ने भाई राज के साथ हाथ मिलाने की जगह कांग्रेस के साथ ही मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ा होता तो नतीजे कुछ और होते. उद्धव की शिवसेना बीएमसी में 65 सीटें मिली हैं और वह बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना महज 6 सीटों पर सिमट गई. बीएमसी चुनाव में एआईएमआईएम ने भी 6 सीटें अपने नाम की है.
इस तरह मुंबई के मेयर पद के चुनाव में अब शिंदे सेना की भूमिका भी अहम हो गई है. खबर है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मेयर पद पर दावा ठोंक दिया है. वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि मुंबई का मेयर मराठी, हिंदू और महायुति से होगा. ऐसे में बीएमसी चुनाव के फाइनल नतीजे साफ होने के बाद अब सबकी नजरें इसी सवाल पर आ टिकी हैं कि मुंबई का मेयर कौन होगा.

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