भोपाल। 
मध्य प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने 'सेफ सिटी' अभियान के तहत एक क्रांतिकारी योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी शहरों के संवेदनशील स्थानों पर करीब सवा लाख अत्याधुनिक वीडियो एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
क्या करेंगे ये स्मार्ट कैमरे
ये स्मार्ट कैमरे न केवल चौबीसों घंटे निगरानी करेंगे, बल्कि सड़क पर किसी भी संभावित खतरे को भांपकर पुलिस कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट भी भेजेंगे। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये कैमरे अकेली महिला या संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान करने में सक्षम होंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सुनसान गली में कोई महिला अकेली जा रही है या किसी शिक्षण संस्थान के बाहर पुरुषों के झुंड के बीच कोई लड़की फंसी है, तो सिस्टम इसे 'खतरे का संकेत' मानकर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित कर देगा।
सुसाइड रोकने के लिए भी होगा कारगर
इसके अलावा, पुलों से कूदकर आत्महत्या करने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भी इन कैमरों को विशेष रूप से प्रोग्राम किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा शासन को भेजे गए इस एक हजार करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट में पुराने नेटवर्क को भी अपग्रेड किया जा रहा है। सवा लाख नए कैमरों के साथ रेलवे स्टेशन, डायल 112 और थानों के लगभग 25 हजार कैमरों को एक ही ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
लखनऊ मॉडल पर होगा काम
पूरे प्रदेश में मॉनिटरिंग के लिए 65 हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। लखनऊ मॉडल पर आधारित इस सिस्टम से न केवल महिला सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं, तेज रफ्तार वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी। निर्भया फंड के तहत शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट से पुलिस कर्मियों के मूवमेंट और ड्यूटी की निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।