क्लीन एयर रैंकिंग में फिसड्डी साबित हुए भोपाल और ग्वालियर, इंदौर में प्रदूषण डेटा से छेड़छाड़
भोपाल।
भोपाल और ग्वालियर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) के तहत मध्य प्रदेश के जिलों के प्रदर्शन में सबसे पीछे हैं। यह खुलासा आगामी कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के लिए तैयार की गई एक प्रस्तुति में हुआ है। वहीं, इंदौर और देवास इस सूची में शीर्ष पर हैं।
एमपी के 7 शहर शामिल
यह प्रस्तुति राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 15 जनवरी को होने वाली कॉन्फ्रेंस से पहले सामने आई है। इस कार्यक्रम के तहत मध्य प्रदेश के सात शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, देवास और सागर शामिल हैं। इन शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए 2025-26 के लिए कार्य योजनाएं तैयार कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को सौंपी जा चुकी हैं।
भोपाल और ग्वालियर का AQI खराब
हाल ही में, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भोपाल और ग्वालियर दोनों शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को 'खराब' बताया है। यह स्थिति तब है जब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर में प्रदूषण डेटा में हेरफेर करने के आरोप में स्वचालित वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों को बंद करने का आदेश दिया था।
शहरों को बनाने होंगे माइक्रो एक्शन प्लान
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत, भोपाल, उज्जैन और सागर को अपनी शीतकालीन कार्य योजना को अंतिम रूप देना है। वहीं, सभी शहरों को वायु प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए माइक्रो एक्शन प्लान बनाने होंगे। राज्य सरकार की प्रस्तुति के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में शामिल नहीं किए गए जिलों में नरसिंहपुर और सिंगरौली वायु प्रदूषण के स्तर के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में से हैं।

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