सैफ अली खान ने जीती भोपाल में अरबों की 'जमीनी जंग', नवाब खानदान के पास ही रहेगी 16 एकड़ की रियासत
भोपाल।
राजधानी के नयापुरा क्षेत्र की 16.62 एकड़ पुश्तैनी भूमि को लेकर चल रहा ढाई दशक पुराना विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। चौदहवें अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल की अदालत ने सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और बहनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विपक्ष की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
1998 से चल रहा था विवाद
यह विवाद साल 1998 में तब शुरू हुआ था, जब अकील अहमद और उनके साथियों ने इस जमीन पर अपना दावा ठोका था। उनका कहना था कि 1936 में नवाब हमीदुल्लाह खान ने यह जमीन उनके पूर्वजों को दान दी थी। लेकिन, अदालत में दावों की हवा तब निकल गई जब विपक्षी पक्ष दान से जुड़ा कोई भी ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका। पटौदी परिवार के वकील सैयद फैजान हुसैन ने दलील दी कि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि हमेशा से नवाब परिवार के नाम ही दर्ज रही है।
बेशकीमती जमीन पर मिल गया मालिकाना हक
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह याचिका न केवल सबूतों के अभाव में कमजोर है, बल्कि इसे दाखिल करने में भी कानूनन काफी देरी की गई थी। इस फैसले के बाद अब पटौदी खानदान का इस बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक पूरी तरह से साफ हो गया है। शहर के रियल एस्टेट और राजनीतिक हलकों में इस फैसले की खासी चर्चा है, क्योंकि यह जमीन शहर के प्राइम लोकेशन पर स्थित है।
गौरतलब है कि सैफ अली खान भोपाल के नवाब हैं। उनकी कई संपत्तियां यहां हैं, जिन्हें लेकर कोर्ट में विवाद चल रहा है। एक मामले में उन्हें बड़ी राहत मिल गई है। सैफ परिवार के लोग बीच-बीच में यहां आते रहते हैं।

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