• कानून के दायरे में रहना होगा
  • 5 साल में 10% से कम मामलों में सजा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त लहजे में कहा कि वह ठग की तरह काम नहीं कर सकती। उसे कानून की सीमा में रहकर ही कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी की शक्ति देने वाले 2022 के फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि ED की छवि को लेकर भी चिंता है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि पिछले पांच साल में ED ने करीब 5 हजार मामले दर्ज किए, लेकिन इनमें सजा की दर 10% से भी कम है।
उन्होंने कहा, 'आप कानून के दायरे में रहकर काम करें। जब लोग 5-6 साल जेल में रहने के बाद बरी हो जाते हैं, तो इसकी भरपाई कौन करेगा?’ इस पर केंद्र और ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि प्रभावशाली आरोपी जानबूझकर जांच में देरी करते हैं।
दरअसल, जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने विजय मदनलाल चौधरी केस में ED की गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त करने और तलाशी-जब्ती की शक्तियों को बरकरार रखा था। इस मामले में सांसद कार्ति पी चिदंबरम और अन्य लोगों ने समीक्षा याचिकाएं दायर की थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब समय आ गया कि सख्ती की जाए
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि PMLA के लिए TADA और POTA की तरह अलग कोर्ट बनाई जाएं, जहां रोजाना सुनवाई हो। इससे मामलों का जल्द निपटारा होगा। उन्होंने कहा, 'प्रभावशाली आरोपी फिर भी याचिकाएं दायर करेंगे, लेकिन उन्हें पता होगा कि अगली ही तारीख पर फैसला हो जाएगा। अब वक्त आ गया है कि ऐसे लोगों पर सख्ती की जाए।’
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कानून पर गंभीरता से हो विचार
सुनवाई के दौरान एएसजी राजू ने बताया कि कई आरोपी देश छोड़कर केमैन आइलैंड जैसे देशों में चले जाते हैं और क्रिप्टोकरेंसी जैसे आधुनिक तरीकों से जांच को प्रभावित करते हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सरकार को क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।