रक्षाबंधन पर 297 साल बाद खास संयोग
भद्रा से मुक्त रहेगा पर्व
देशभर में सबसे पहले महाकाल को अर्पित होगी राखी
भोपाल। शनिवार को देशभर में रक्षाबंधन खास संयोग के साथ मनेगा। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक का ये पर्व इस बार श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, करण, मकर राशि में चंद्रमा और पूर्णिमा तिथि के संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा योग 297 साल बाद बना है। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने कहा- ग्रहों की वर्तमान स्थिति 1728 में बने दुर्लभ संयोग को दोहरा रही है। 8 ग्रह उन्हीं राशियों में रहेंगे, जिनमें 1728 में थे। इनमें सूर्य कर्क, चंद्र मकर, मंगल कन्या, बुध कर्क, गुरु और शुक्र मिथुन, राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में रहेंगे। ऐसे अद्भुत योग शताब्दियों में एक बार ही बनते हैं। जिससे इस बार का रक्षाबंधन और भी पुण्यफलदायी माना जा रहा है।
पूरे दिन बांधी जा सकेगी राखी
पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि रक्षाबंधन पर शनिवार को दोपहर 2:43 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो किसी भी काम को सफल बनाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मुहूर्त और चौघड़िए के अनुसार रक्षा सूत्र या राखी बांधी जा सकेगी।
रक्षाबंधन भद्रा काल से मुक्त
- बहनें पूरे दिन भाइयों को राखी बांध सकेगी
- प्रातः काल से दोपहर तक शुभ मुहूर्त
इस बार भद्रा का कोई योग नहीं है इस दृष्टि से रक्षाबंधन का त्योहार मुहूर्त में और चौघड़िया के अनुसार भी मनाया जा सकता है। इस दृष्टि से प्रातः काल से लेकर के दोपहर 2:40 तक शुभ मुहूर्त रहने से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी दिन
इस बार शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। इस योग का समय मध्यान्ह 2:40 तक रहेगा। इस दौरान पर्व काल तो मनेगा ही इसके बाद भी सायं काल में शुभ योग रहेंगे उसमें भी रक्षा सूत्र बांधा जा सकेगा। इसके अलावा कुल परंपरा के अनुसार समय के निर्धारण से रक्षा सूत्र बांधना चाहिए।

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