सिंगरौली। 
सिंगरौली के घिराली कोल ब्लॉक के लिए तेजी से हो रही बड़े पैमाने की पेड़ों की कटाई को लेकर राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। पर्यावरणीय नुकसान और वन क्षेत्र पर बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने एक तथ्य अन्वेषण समिति गठित कर दी है, जो 11 दिसंबर 2025 तक सिंगरौली पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। समिति का नेतृत्व प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा है कि सिंगरौली में “अनियंत्रित और असामान्य गति से” पेड़ों की कटाई हो रही है, जो पर्यावरण, स्थानीय आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा है। पार्टी का आरोप है कि घिराली कोल ब्लॉक में वन संरक्षण कानून व पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए मशीनों से पेड़ों को उखाड़ा जा रहा है।
कांग्रेस की जांच समिति में ये नेता शामिल

  • जीतू पटवारी
  • उमंग सिंघार
  • मीनाक्षी नटराजन
  • अजय सिंह
  • कमलेश्वर पटेल
  • हेमंत कटारे
  • राजेंद्र कुमार सिंह
  • हिना कावर
  • विक्रांत भूरिया
  • ओंकार मरकाम
  • जयवर्धन सिंह
  • बाला बच्चन

11 दिसंबर तक सिंगरौली में जाकर करेगी ग्राउंड रिपोर्ट
कांग्रेस का कहना है कि समिति स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, विस्थापित परिवारों और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर यह जानने का प्रयास करेगी कि पेड़ों की कटाई की वास्तविक मात्रा कितनी है?
क्या पर्यावरणीय अनुमति और वन संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का पालन हुआ? स्थानीय लोगों की राय और आपत्तियाँ क्यों नहीं ली गईं? कोल ब्लॉक के लिए हुई कटाई में क्या किसी प्रकार की अनियमितता शामिल है? इसके आधार पर समिति एक विस्तृत रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी।
कांग्रेस की आपत्तियां क्या-क्या हैं?
यह केवल कोल ब्लॉक नहीं, पर्यावरण पर सीधा हमला है। कांग्रेस का आरोप है कि हजारों पेड़ एक बार में काटे जा रहे हैं, जिससे सिंगरौली क्षेत्र का पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ रहा है।
स्थानीय समुदायों से बिना परामर्श अनुमति और कार्यवाही
पार्टी का कहना है कि ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों को विश्वास में नहीं लिया गया, जबकि कोल ब्लॉक का पूरा क्षेत्र उनकी आजीविका, जलस्रोतों और जंगलों से जुड़ा है।
वन एवं पर्यावरण नियमों में गंभीर उल्लंघन
कांग्रेस का आरोप है कि कटाई शुरू करने से पहले सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, पुनर्वनीकरण योजना, जैसी प्रक्रियाओं का ठीक से पालन नहीं किया गया।
सरकार पर “जल्दबाज़ी में अनुमति देने” का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता अधिक है, वहाँ इतनी तेज़ी से जंगल साफ कर देना संदिग्ध है।