बंदूक की नोक पर 'नारी वंदन': शिवपुरी में सरेराह युवती का अपहरण, चीखें दबाता सिस्टम और बेखौफ गुंडे!
शिवपुरी/भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से अपहरण का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो सूबे की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के दावों को सरेआम चुनौती दे रहा है। कोतवाली थाना क्षेत्र के फतेहपुर में कल शाम जो हुआ, उसने पूरे शहर में दहशत फैला दी है। 8 से 10 नकाबपोश बदमाश, हाथों में हथियार और लाठियां लिए एक घर में घुसते हैं, परिवार को बेरहमी से पीटते हैं और एक युवती को उसकी तीन महीने की मासूम बच्ची के साथ जानवरों की तरह घसीटते हुए कार में डालकर ले जाते हैं।
चीखती रही महक, तमाशबीन बना रहा प्रशासन
वायरल सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि युवती (महक) अपनी जान बचाने के लिए बुरी तरह चीख रही है, संघर्ष कर रही है, लेकिन दरिंदगी की हदें पार कर चुके आरोपी पुष्पेंद्र चौहान और उसके गुंडों को रत्ती भर भी रहम नहीं आया। युवती की माँ नीलम का आरोप है कि आरोपी पहले भी महक को प्रताड़ित कर चुका है और पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। माँ का दर्द यह है कि पुलिस ने शिकायत को 'घरेलू मामला' बताकर टाल दिया, जिसका नतीजा आज इस भयावह किडनैपिंग के रूप में सामने आया है।
सोशल मीडिया पर 'सफाई' और दबाव का खेल
हैरानी की बात यह है कि अपहरण के कुछ ही घंटों बाद आरोपी पुष्पेंद्र चौहान ने एक वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया। उसने दावा किया कि महक उसकी पत्नी है और उसने खुद मैसेज कर उसे बुलाने को कहा था। दबाव में युवती से भी एक बयान दिलवाया गया कि वह 'स्वेच्छा' से आई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर युवती को अपनी मर्जी से जाना था, तो वह वीडियो में जानवरों की तरह घसीटे जाने पर चीख क्यों रही थी? क्या बंदूक की नोक पर लिया गया बयान कानून की नजर में कोई मायने रखता है?
पुलिस की कार्रवाई और उठते सवाल
शिवपुरी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 1 नामजद और 10 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि युवती के बयान मिलने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि वे दिनदहाड़े हथियारों के साथ अपहरण जैसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं?
विज्ञापन में वंदन, सड़क पर क्रंदन!
एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर 'नारी वंदन' के होर्डिंग लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर बेटियों को घसीटा जा रहा है। मुख्यमंत्री जी, ये चीखें मंत्रालय के बंद कमरों तक पहुँचनी चाहिए। अगर लिव-इन रिलेशनशिप या पारिवारिक विवाद का नाम देकर ऐसी गुंडागर्दी को ढका गया, तो प्रदेश की कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं रहेगी। अपराधियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि दोबारा किसी की रूह भी ऐसा कदम उठाने से पहले कांप जाए। कानून अपना काम करेगा, लेकिन जो दहशत सड़कों पर फैली है, उसका हिसाब कौन देगा? पुलिस की 'टालू' प्रवृत्ति ने ही अपराधियों को यह साहस दिया है। अब देखना है कि प्रशासन इस 'अपहरण कांड' में न्याय करता है या इसे भी फाइलों में दबा दिया जाता है।

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