रविंद्र आचार्य जी महाराज बोले... दूषित हैं प्रदीप मिश्रा का कुबेरेश्वर धाम, अकाल मौतें होती रहेगी
सीहोर, सबकी खबर।
पिछले तीन दिन से लगातार सिहोर के पास जो कुबेरेश्वर धाम है, वहां जो अव्यवस्थाओं के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। वहां के बाबा ने अपने बेतरतीब बयानों से 7 अकाल मौंतों को लेकर पल्ला झाड़ लिया है। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। सरकार ने भी फौरी तौर कार्रवाई करने के निर्देश तो दे दिए हैं लेकिन कार्रवाई कुछ होती नजर नहीं आ रही है। दिखावे के लिए स्थानीय प्रशासन ने डीजे वालों को बलि का बकरा बना दिया हैं। बाबा का विरोध और तेज होता है तो एक निर्दोष पत्रकार भी बलि की वेदी चढ़ने के लिए तैयार कर लिया है। धाम में पिछले तीन दिन में पांच, छ और 7 अगस्त तक वहां लगभग सात से आठ लोगों की मौत हो चुकी है और पांच से छह लोग अभी भी लापता हैं। मिल नहीं रहे हैं। प्रशासन हाथ पे हाथ धरे बैठा हुआ है। कलेक्टर एसपी कोई कारवाई करने को तैयार नहीं है। जबकि नियमानुसार पूरे देश भर में इस तरह की यदि कहीं घटनाएं हुई हैं तो जो व्यक्ति परमिशन लेता है, जो व्यक्ति इस आयोजन को करता है, वह आयोजकों के खिलाफ निश्चित तौर पे एफआईआर होती है। लेकिन पता नहीं क्यों सिहोर के मामले में प्रशासन ने मौन साध लिया है। तो आज सवाल यह है कि क्या हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या लोअर कोर्ट स्वयं संज्ञान लेगा। क्या वो खुद इनको नोटिस देगा? या कोई ऐसा सामाजिक कार्यकर्ता जो कोर्ट में जाए और कोर्ट में जाकर बताएं कि इस तरह की व्यवस्थाएं आगे तब तक ना हो जब तक वहां व्यवस्थाएं ना हो जाए। आप और हम जानते हैं कि तीन दिन तक भोपाल और इंदौर का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था। लोग कितने परेशान हुए हैं, कितने लोग मारे गए हैं? ये तमाम सारी चीजें हो गई लेकिन पीठाधीश्वर हैं पंडित प्रदीप मिश्रा उनका अता पता नहीं है। एक वीडियो जारी करके वो लापता हो गए हैं। मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं और जिनके घर में यह मौतें हुई हैं वे भी अब उन पीठाधीश्वर को भला बुरा कह रहे हैं। उनका कहना है कि कोई देखने वाला नहीं है। कोई शोक व्यक्त करने
वाला नहीं है। घर तक डेड बॉडी ले जाने के लिए भी व्यवस्था नहीं है। तो इन तमाम सारे मुद्दों पर क्या हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेंगे इस मुद्दे पर आज हमने भोपाल के जानेमाने मां पीतांबरा पीठाधीश्वर हैं अनंत श्री विभूषित जगत पूज्य अह रामानुज रविंद्र आचार्य जी महाराज जो भोपाल में ही हैं और यह राष्ट्रीय संयोजक हैं आर्यवर्त षट दर्शन साधु मंडल के हमने इनसे समझने की कोशिश की तो उनका कहना था कि अधिकांश लोगों ने कथा वाचकों को ही संत समझ लिया है। उन्हीं को प्रणाम कर रहे हैं और उन्हीं से अपनी सारी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। क्या कहेंगे महाराज जी? यह दुखद जो आपने समाचार अभी दिया है कि सात आठ लोग जो है भगवान के श्री चरणों में पलायन कर गए हैं। तो यह साधु और कथाकार में फर्क यह है कि साधु पहले अपनी व्यवस्था जितनी होती है उतने लोगों को आमंत्रण देता है। खानेपीने रहने और हर प्रकार की और कथाकार जो है वह चाहते हैं खाली भीड़ बुलाना और उनका प्रयास क्या है? कथाकार किस प्रयोजन से इतने बड़े-बड़े आयोजन करते हैं जिसमें सरकार अगर इन प्रकार के इस प्रकार के आयोजनों के लिए पहले से व्यवस्था नहीं करती तो इस प्रकार की घटनाएं और मेरा मानना यह है कि जब से प्रदीप मिश्रा ने कुबेरेश्वर धाम बनाया है शायद हो सकता है कि कहीं ना कहीं कोई ऐसी त्रुटि हुई है कि वहां हर साल कुछ ना कुछ अनहोनी घटनाएं होती रहती है जो शास्त्र के लिए और धर्म के लिए और समाज के लिए और स्थानीय जहां यह आयोजन हो रहा हैउसके लिए भी उचित नहीं है। कलेक्टर हो, कमिश्नर हो इनको जब तक यह ध्यान नहीं देंगे इस प्रकार की घटनाएं होती रहेंगी। अच्छा और हमारे कई घर परिवार जो है इस प्रकार अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं। यह कोई मृत्यु ऐसा नहीं कि सद्गति हो गई। तो मेरा मानना यह है कि शासन को इस प्रकार का अगर कहीं आयोजन हो रहा है तो या तो शासन अपने द्वारा करें या तो आयोजनकर्ता के द्वारा पहले जांच की जाए कि इतने लोगों को कितने लोगों को आने के लिए जैसे शासन कभी-कभी दो चार 5 लाख लोगों को बुलाता है तो लंबा चौड़ा स्थान बनाता है और उनके खाने पीने रहने की व्यवस्था करता है। तो क्या इस प्रकार का प्रदीप महाराज कोई आयोजन करते हैं तो क्या व्यवस्था उन्होंने बना रखी है जो शासन ने उनको अनुमति दे रखी है यह इस प्रकार का जो कृत हो रहे हैं यह हमारे समाज के लिए धर्म के लिए एक भयावह स्थिति पैदा कर रही है कल आने वाले अभी सात लोग मरे हैं कल 7000 मर सकते हैं। 7 लाख मर सकते हैं तो इस प्रकार से यह आयोजन ठीक नहीं है और प्रदीप महाराज जो है जो चमत्कारिक बातें बताते हैं जिसके लिए लोग आते हैं उनके कथा में उनसे भी हमारा सुनने वालों से भक्तों से भी आग्रह है कि इस प्रकार का कोई चमत्कार ककी कथाकार से या किसी संत से आप ऐसी उम्मीद ना करें कि हम उनकी विचारों को सुनकर के और हम इस प्रकार से इस देश में इस संसार में इस स्थान पे जहां हम रह रहे हैं संपन्न और हर तरह से अपने परिवार को सुखी और संपन्न बना सकते हैं। आपको बताएं कि एक दोष जो है एक भोजपुर मंदिर में भी है जो आज तक वो मंदिर अधूरा रह गया जबकि इतना प्राचीन मंदिर है और ऐसा भव्य मंदिर शायद भारत में कहीं नहीं भारत में नहीं कहीं विश्व में कहीं नहीं इतना ऊंचा शिवलिंग नहीं होगा और यह बात हम कह रहे हैं कि जबसे प्रदीप महाराज ने आयोजन शुरू किया है कुछ ना कुछ घटनाएं होती है तो कोई ना कोई दोष तो बगैर दोष के जिस प्रकार के अकाल मृत्यु नहीं होते हैं। आपको बताएं कि पहले इस सिहोर रोड पे कई घटनाएं हर महीने दो महीने में या मेरे विचार से हर सप्ताह में एक दो एक्सीडेंट होता था। एक दो जरूर अकाल मृत्यु होती थी। उसमें सिहोर में नरसिंह मंदिर है बड़िया खेड़ी में उसके महंत थे लेकिन आते आते समय भैंस से एक्सीडेंट हो गया और फंदा के करीब और वहीं पर उनकी जो है ये अस्पताल में भर्ती रहे फिर उनका प्राणांत हो गया तो वहां जो है जो यह कार्यक्रम होता है जो क्षेत्र है जरूर कहीं ना कहीं दूषित है किसी भी प्रकार से चाहे वहां कोई इन्होंने जो स्थापना की है उसमें त्रुटि हो या उस भूमि में त्रुटि हो नहीं तो ऐसा होता नहीं है इतना बढ़िया उन्होंने जो है नाम दिया है कुबेरेश्वर महादेव तो मैं समझता हूं कि वहां जो लोग दर्शन के लिए जाएं वह खजाने का मालिक बने लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है बल्कि यह हो रहा है कि खजाना तो ठीक है लेकिन कुछ लोग वहां पीड़ा पा रहे। रूद्राक्ष को लेकर महाराज जी ने कहा कि सा है कि अभी कुछ दिन पहले कोई जादूगर आया था और मेरे को ले गया था सिनेमा हॉल में तो उसने भी बहुत से जादुएं बताई। लेकिन जादू क्या है? एक खाली दिखावा है। सत्यता नहीं है। रुद्राक्ष को धारण करने के लिए ध्यान रखिएगा अगर प्रभु की कृपा है तो आप ऐसे ही धारण कर लीजिए सफल हो जाएंगे। लेकिन किसी को जब हम देते हैं रुद्राक्ष तो कम से कम जो भगवान शिव का ओम नमः शिवाय मंत्र है कम से कम जितने अक्षर का मंत्र है उतने लाख जप हो तब वो सिद्ध होता है। तो आप लोगों को क्या कहेंगे दादा जी जो रुद्राक्ष के लालच में आ जाते हैं क्या इनकी समस्याएं इस रुद्राक्ष से जो यहां बांट जाती हैं मुझे पता चला है कि वहां तो बोरों में भर के आते हैं और ऐसे फेंके जाते हैं लोग लपकलपक के ले जाते हैं और उसके लिए भगदड़ मचती है और अव्यवस्था होती है। अगर ऐसा होता कि रुद्राक्ष से ही लोग संपन्न और समृद्धिशाली हो जाते, पराक्रमी हो जाते तो हमारे यहां बहुत से ऐसे वृक्ष हैं जो जिनमें से ऑटोमेटिक लोग ले आ सकते हैं बोरों से और रुद्राक्ष का यह सब खाली एक चमत्कार का नाम दे के भीड़ इकट्ठा करना है और भीड़ इकट्ठा करने के बाद फिर इस प्रकार के दुर्घटनाएं होती रहेंगी। अगर भविष्य में इस प्रकार से शासन प्रशासन या वहां का स्थानीय जो कलेक्टर हैं कमिश्नर हैं ये लोग अगर ध्यान नहीं देंगे वहां के जो विधायक महोदय हैं वो बड़े धर्मशील हैं। अगर वह चाहे तो यह सब काम सुगमता से और सरलता से और अच्छे तरह से हो सकता है।

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