अमीरों ने डाला गरीबों के राशन पर डाका, EKYC में 2483 अपात्र परिवारों का खुला राज, कटेंगे नाम
सीहोर।
सीहोर जिले में गरीबों के नाम पर चलाई जा रही राशन योजना का बड़ा खेल सामने आया है। विभागीय ईकेवायसी जांच में खुलासा हुआ कि आर्थिक रूप से सम्पन्न, टैक्स चुकाने वाले और कारोबार करने वाले लोग भी गरीबों का राशन लेने से पीछे नहीं हटे। यह योजना मूल रूप से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए थी। मगर 2483 ऐसे परिवारों की सूची बनी है, जिन्होंने अमीर होते हुए भी योजनाओं का लाभ उठाया।
टैक्स पेयर और कंपनी मालिक भी शामिल
खाद्य विभाग की जांच में पता चला कि कई ऐसे लोग भी गरीबों के लिए बने राशन कार्ड का उपयोग कर रहे थे, जिनकी सालाना आय लाखों रुपये है। इनमें जीएसटी चुकाने वाले व्यापारी, सालाना 25 लाख से अधिक टर्नओवर करने वाले कारोबारी और कंपनी के संचालक शामिल हैं। विभाग ने इस तरह के अपात्र लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
तीन कैटेगरी में 2483 अपात्र
विभाग ने अपात्र परिवारों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली कैटेगरी में 6 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले 2259 लोग हैं। दूसरी श्रेणी में 208 लोग शामिल हैं जो अपनी कंपनियां चला रहे हैं। तीसरी श्रेणी में 25 लाख से अधिक टर्नओवर वाले 16 कारोबारी शामिल हैं, जो जीएसटी भी अदा कर रहे हैं।
गरीबों का राशन, अमीरों की थाली
हैरत की बात यह है कि इन अमीर परिवारों ने केवल राशन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी गरीबों की योजनाओं से लिया। कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनके पास महंगी गाड़ियां और कारोबार हैं, लेकिन सरकारी राशन भी उन्हीं के घर पहुंचा। इससे गरीबों के असली हकदारों तक अनाज पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
नोटिस भेजकर मांगा जवाब
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अपात्र परिवारों को नोटिस जारी कर दिया है। 15 दिन के भीतर इन्हें जवाब देना होगा कि क्यों उन्होंने गरीबों की योजना का अनुचित लाभ उठाया। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो एम राशन मित्र पोर्टल से इनके नाम काट दिए जाएंगे।
आधार और ईकेवायसी से खुला राज
ईकेवाइसी अभियान में आधार और समग्र आईडी के आधार पर हितग्राहियों का मिलान किया गया। इसी दौरान ऐसे नाम पकड़ में आए जिन्होंने वर्षों से अपात्र होने के बावजूद राशन लिया। अब इन पर कार्रवाई तय है।
10 लाख से ज्यादा राशन हितग्राही
वर्तमान में जिले में 2 लाख 27 हजार 817 परिवारों के 10 लाख 15 हजार से ज्यादा सदस्य सरकारी राशन ले रहे हैं। 92 प्रतिशत हितग्राहियों की ईकेवायसी पूरी हो चुकी है और 9 लाख से अधिक लोगों का डेटा विभाग के पास है।

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