मप्र में बना नया इतिहास अपने ही विधायक पर करोडों का फाइन लगाकर मोहन ने दिया सख्त संदेश, कोई भी नहीं बचेगा
अरबपति विधायक संजय पाठक को देना होगा करीब 1500 करोड का फाइन
शिकायत के तीन महीनों के भीतर ही जांच टीमों ने सौंप दी रिपोर्ट
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया इतिहास बना है और यह इतिहास केवल डॉ. मोहन यादव ही बना सकते थे। कोई दूसरा नहीं। आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में जो उत्तर दिया है, जो जवाब दिया है, वह इतिहास बन गया है। और जवाब यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक मध्य प्रदेश के अरबपति विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों पर अवैध और एक्सिस माइनिंग को लेकर लगभग ₹00 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। दंड लगाया गया है और यह केवल ₹500 करोड़ 500 करीब 443 करोड़ मूलधन है। मूल राशि है। यह फाइन है। अब इस पर जीएसटी भी लगाया जाएगा। बैंक ब्याज भी लगाया जाएगा। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि आज तक किसी सरकार ने अपनी पार्टी के विधायक पर इतना बड़ा अर्थदंड लगाया हो और यह कोई विधायक जी आज से नहीं कर रहे हैं। यह एक्सिस माइनिंग जाने कब से कर रहे हैं। लेकिन जब पकड़े जाए तब चोर हैं। अब यह पकड़े गए हैं। इनके परिवार की कंपनियां पकड़ी गई हैं। इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने शिकायतकर्ता आशतोष मनु दीक्षित हैं इनसे बात की इनसे समझा कि आखिर अरबपति विधायक संजय पाठक ने कैसे एक्सिस माइनिंग का खेल किया। उससे पहले आपको बताते चलें कि कटनी के ही रहने वाले आशुतोष मनू दीक्षित ने एक शिकायत 31 जनवरी 2025 को ईओडब्ल्यू में की थी और उन्होंने तमाम सारे प्रमाण दिए थे के संजय पाठक की जो तीन कंपनियां हैं उनके परिवार की जिसका नाम है आनंद माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड , दूसरी है निर्मला मिनरल्स एवं तीसरी है पेसिफिक एक्सपर्ट ये तीन कंपनियां एक्सिस माइनिंग कर रही है ये सभी कंपनियां जबलपुर के सिहोरा के आसपास है और यह एक्सिस माइनिंग कर रहे हैं और लगभग ₹1000 करोड़ की खनिज चोरी कर चुके हैं। यह आरोप था। आरोप का पूरा अध्ययन करने के बाद ईओडब्ल्यू ने 23 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव खनिज विभाग को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा था कि यह मामला आपके विभाग से संबंधित है। या तो आप जांच करिए या हमें जांच करने के लिए आदेशित करिए। दोनों बातें उन्होंने अपने पत्र में लिखी थी क्योंकि वे चाहते थे कि यदि विभाग कहता है तो हम भी जांच करेंगे। लेकिन प्रमुख सचिव ने इसके लिए एक जांच टीम बनाई और जांच टीम ने बाकायदा पूरी सेटेलाइट से एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए वहां जाकर जांच की मौके पे और जो शिकायतकर्ता है आशतोष मनु दीक्षित जब उन्हें बुलाया तो उन्होंने भी उनके टेबल पर तमाम सारे सबूत पटक दिए कि परमिशन कितनी ली थी खनन कितने में किया है जब सारे सबूत आ गए तो 6 जून को 31 जनवरी को यह शिकायत कॉपी आई है ईओब्ल्यू में अप्रैल में ईओडब्ल्यू ने भेजी मई में शिकायत्तकर्ता के बयान हुए हैं खनिज विभाग में और जून में यह पूरी की पूरी रिपोर्ट आ गई है और मुख्यमंत्री ने आज विधानसभा में जो कहा है उन्होंने बताया है कि चार 443 करोड़ इन पर फाइन लगाया गया है और इस अमाउंट पर अभी जीएसटी लगना है और ब्याज की राशि यह वसूली की कारवाई के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने पूरी फाइल जबलपुर कलेक्टर को भेज दी है। मामले को लेकर जबलपुर कलेक्टर से पूछा था तो उन्होंने इस बात को कंफर्म किया था कि फाइल उनके पास आ रही है। अब संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से यह वसूली शुरू होगी। क्या प्रक्रिया होगी? इन तमाम सारी चीजों को विस्तार से बतात हैं आखिर यह शिकायत क्यों की गई? प्रमाण कहां से आए? हम सीधे आपको जोड़ते हैं। आशुतोष मनु दीक्षित जो इस पर शिकायतकर्ता है। और एक बात बता दूं यह कभी संजय पाठक के खास हुआ करते थे। संजय पाठक को यह बड़ा भाई मानते। आशुतोष ने बताया कि संजय पाठक जी को अपने संसाधन का अपनी कथित सत्ता का इतना ज्यादा घमंड हो चुका था कि पिछले 5 सात सालों में कटनी में कम से कम 150 200 लोग हैं जो बहुत बुरी तरीके से इनके द्वारा प्रताड़ित हुए। उसमें मैं भी हो सकता हूं। कोई ऐसा नहीं है कि इससे भी दूसरों की लड़ाई इसमें मेरा कोई लेना देना नहीं था। उसमें उनकी जो प्रताड़ना का चक्रव्यूह था उसमें मैं भी था। मेरा परिवार भी था। तो यह देख के बहुत घुटन हो रही थी और अपने अस्तित्व में कभी-कभी सवाल उठता था कि आखिर किसी व्यक्ति के पास सत्ता है और चोरी किया हुआ धन है तो क्या कोई व्यक्ति इतना हावी हो जाएगा सारे 15 लाख आबादी कटनी जिले की उसके ऊपर और हम अपनी पीढ़ियों के लिए क्या यह गुलामी की व्यवस्था छोड़ के जाएंगे कि पहले की पीढ़ी ने इनकी गुलामी की फिर हमारी पीढ़ी इनकी गुलामी करे फिर हमारे बाद की पीढ़ी इनकी गुलामी करे तो बस इन सबके खिलाफ एक दिन मन हो गया कुछ ऐसी घटनाएं लगातार चल रही थी जिनको लेकर मन व्यथित एक दिन मन हुआ कि बस अब खड़े होना है, लड़ना है और अंजाम कुछ भी हो शुरू में तो मुझे पता नहीं था कि कारवाईया होंगी या नहीं होंगी। मुझे तो यह पता था कि हो सकता है हम ही न रहे शिकायतें करने के बाद। यह ₹443 करोड़ मूल पेनल्टी है। इसमें 18% जीएसटी यानी 80 करोड़ जीएसटी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो आर्डर है कॉमन कॉज वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया में उसमें अभी मैं आपके यहां आने के पहले दिल्ली के एक उसके विशेषज्ञ से बात कर रहा था। उड़ीसा से ही हैं वो। तो उनका कहना था कि इसमें 18% पर ईयर का कंपाउंड इंटरेस्ट है। अगर उस टाइप से कैलकुलेशन करते हैं तो यह राशि जा रही है 1480 करोड़। अभी वन में इनका उत्खनन हुआ है वनफॉरेस्ट की लैंड में फॉरेस्ट की लैंड में उसके बाद राजस्थानफॉरेस्ट वाले सो रहे हैं क्या वो बोल नहीं रहे। तो अभी वो फॉरेस्ट की जांच होगी। उसके बाद राजस्व की जमीनों पे बहुत उत्खनन हुआ। उसकी जांच होगी। इन्होंने एक खदान थी उससे पूरा उत्खनन कर लिया। उसको लेटराइट के नाम पे अब सेंशन करा रहे हैं। आर खदान उन्होंने उत्खनन किए और यह तीन कंपनियों की छह खदान हैं। आज हमारी जो सरकार है मध्य प्रदेश की सरकार है वह छोटे व्यक्ति से जब किसी चीज की वसूली की बात आती है तो 5000 ₹100 ₹00 की वसूली भी जो छोटा आदमी रहता है वो खुद से जाकर के जमा कर देता है कि भैया हमारे ऊपर इतनी लायबिलिटी है इतना बिल है इतना गैस का बिल है बिजली का बिल है फलाने होटल वाले का बिल है वो जाके दे देता है और बड़े लोग इतनाइतना पैसा दबा के बैठे रहते हैं औरलाडली बहना योजना के लिए हमारी मध्य प्रदेश सरकार के बारे में मैं पढ़ता हूं कि आज फिर वर्ल्ड बैंक के पास पहुंचे, आईएमएफ के पास पहुंचे। तो यह तो सीधा-सीधा एक तरीका है कि अगर यह वसूली हो जाए राखी के पहले तो राखी की किस्त विद बोनस दी जा सकती है। सहारा समय के मामले को श्री दीक्षित ने कहा कि अभी संजय पाठक आरोपी नहीं बने उनका परिवार के लोग। लेकिन जिनने जमीन बेची है वो आरोपी बने हैं। उन्हें बनाने की भी कोशिश चल रही है। पाठक के खिलाफ इतने मामले हैं सब पर बात तो नहीं हो सकती लेकिन आपकी खबर के माध्यम से एक बात जरूर बताना चाहूंगा कि संजय पाठक जी थोड़ा सा अगर पब्लिक के प्रति एक अपना रवैया सही रखते इस तरीके का अहंकार या जंगल राज या उनको जो एक गुरूर हो गया था जंगल राज चलाने का और गुंडागर्दी करने का तो बस यह सब होता नहीं।

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