सागर। 
मध्य प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड में जिस तरह से भाजपा के नेता आपस में झगड़ रहे हैं और गुटबाजी कर रहे हैं, पार्टी की जमकर किरकिरी हो रही है. ताजा विवाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विधानसभा क्षेत्र सुरखी के जैसीनगर विकासखंड के नाम बदले जाने को लेकर सामने आया है. 25 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सागर के दौरे पर थे और उन्होंने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विधानसभा क्षेत्र के जैसीनगर में सभा को संबोधित किया था. तब मांग उठी थी कि जैसीनगर का नाम जय शिवनगर किया जाए. मुख्यमंत्री ने भी प्रस्ताव भेजने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद क्षत्रिय महासभा सुझाए गए नाम के खिलाफ सड़कों पर उतर आई और जयशिवनगर की जगह जयसिंह नगर करने की मांग करने लगी, तो मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जैसीनगर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम के बहाने भूपेंद्र सिंह का नाम लिए बिना उनकी जमकर आलोचना की और अपने विधानसभा क्षेत्र में सियासत न करने की सलाह दी.
क्या है मामला
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के सामने जैसीनगर का नाम जय शिव नगर करने का प्रस्ताव आने के बाद और उनकी सहमति के बाद क्षत्रिय नेताओं और संगठनों में जमकर ठन गई है. यह प्रस्ताव मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के भाई जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया था. अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने सहमति जताते हुए प्रस्ताव भेजने की बात की थी, लेकिन इसके बाद क्षत्रिय महासभा जिसके जिला अध्यक्ष पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजे लाखन सिंह बामोरा है, वह विरोध में उतर आए.
क्षत्रिय महासभा का कहना है कि दांगी राजा जय सिंह ने जैसीनगर बसाया था और पहले जैसीनगर का नाम जयसिंह नगर था, जो धीरे-धीरे जैसी नगर हो गया. पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह दांगी समाज से आते हैं. क्षत्रिय महासभा इसे दांगी समाज का भी अपमान बता रही है, लेकिन जैसीनगर में दशहरा मेले के दौरान मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नाम लिए बगैर भूपेंद्र सिंह पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राजनीति करना है, तो अपने घर, अपने गांव और अपने विधानसभा क्षेत्र में करें. जैसीनगर में पत्थर फेंकने की कोई जरूरत नहीं है."
दशहरा कार्यक्रम में गरजे गोविंद सिंह
जैसीनगर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि "जैसीनगर का नाम अकेला शिवनगर नहीं जय शिव नगर करने का प्रस्ताव था. इसका मतलब है कि अगर राजा जयसिंह के नाम पर हमारे जैसीनगर का नाम पड़ा होगा, तो वह नाम नहीं बदला है. मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि आप प्रस्ताव भेजे हम घोषणा कर देंगे, लेकिन अभी प्रस्ताव गया नहीं और पेट में चूहा काटने लगे और यह चूहे किसके पास पेट में काट रहे हैं, हम नाम नहीं लेना चाहते. जो यहां 10 साल मेरे पहले विधायक रहे, विधायक रहते हुए एक पुलिया भी नहीं बनवाई. अगर एक टूटी पुलिया पर भी नाम लिखा हो तो कोई हमें बता दें". वर्तमान में खुरई से विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पहले भाजपा के टिकट पर सुरखी से चुनाव लड़ते थे और दो बार सुरखी के विधायक भी चुने गए. बाद में उन्होंने सुरखी छोड़कर खुरई विधानसभा से चुनाव लड़ना शुरू कर दिया.