सागर।
अभयराज नाम का युवक एंबुलेंस सेवा 108 में ड्राइवर है. जिसने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान खुद आत्महत्या की कोशिश की. एंबुलेंस ड्राइवर की हरकत से कलेक्टर कार्यालय परिसर में हडकंप मच गया. जैसे ही अभयराज ने अपने आप को मारने की कोशिश की, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और कलेक्ट्रेट के स्टाफ ने बमुश्किल उसे बचाया. अभयराज का आरोप है कि प्रभारी जिला अधिकारी उसे ड्यूटी नहीं देता है. इस वजह से उसका वेतन कम आता है और वह अपने परिवार का खर्च भी नहीं चला पाता है. जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
प्रभारी जिला अधिकारी पर रिश्वत के आरोप
दरअसल, जिला कलेक्टर कार्यालय में आत्मदाह की कोशिश करने वाला युवक अभयराज 108 एंबुलेंस में पायलट है. जिसने 108 एम्बुलेंस के सेवा के प्रभारी जिला अधिकारी रविन्द्र खरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उसका कहना है कि जिला अधिकारी लगातार उससे रिश्वत की मांग कर रहे थे. रिश्वत नहीं देने पर उसे प्रताड़ित किया जा रहा था और ट्रांसफर की धमकी दी जा रही थी. अभयराज का कहना है कि, ''या तो उसे बाहर की ड्यूटी दी जाती है और वहां से वापस आने के बाद उसे 10-15 दिन तक ड्यूटी नहीं दी जाती है. दूसरे लड़कों से कहकर पैसे की मांग की जाती है. पिछले दिनों सीएमएचओ कार्यालय में इसी शिकायत पर 10-15 ड्राइवर के कथन हुए. लेकिन कहा जा रहा है कि सिर्फ तीन लोगों के कथन हुए. मुझे ड्यूटी नहीं दिए जाने से मेरी सैलरी कम बनती है. मुझे परिवार का भरण पोषण में दिक्कत आ रही है।
मामले की जांच के आदेश
अपनी शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचे अभयराज ने आत्मदाह की कोशिश की है. अभयराज का कहना है कि, ''परेशान होकर ही जनसुनवाई में अधिकारियों के सामने यह कदम उठाया.'' हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने युवक को रोक लिया और किसी तरह स्थिति को काबू में किया. वहीं घटना के बाद जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.अपर कलेक्कटर अविनाश रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''मामला संज्ञान में आया है. एक युवक ने जनसुनवाई में खुदकुशी की कोशिश की है. शिकायत के बाद जांच कराई जाएगी. जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.''