एमपी हाईकोर्ट का दो टूक संदेश: सिर्फ जल्दी केस निपटाना इंसाफ को दफन करने जैसा
रीवा।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रीवा जिले की एक विशेष POCSO कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें आरोपी को कुछ गवाहों, जिनमें DNA रिपोर्ट बनाने वाले विशेषज्ञ भी शामिल थे, को बुलाने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। यह फैसला आरोपी की अपील पर सुनाया गया। हाई कोर्ट के जस्टिस ए.के. सिंह की बेंच ने कहा, इंसाफ में देरी अगर अन्याय है, तो इंसाफ की जल्दबाजी न्याय को दफन करने जैसा है।
ट्रायल कोर्ट ने दो बार खारिज कर दी याचिका
रीवा जिले के सिरमौर में स्थित ट्रायल कोर्ट ने आरोपी की अर्जी दो बार खारिज कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि यह मामला जिले के 100 सबसे पुराने मामलों में से एक है और हाई कोर्ट ने ऐसे सभी मामलों को छह महीने में निपटाने का आदेश दिया है। ट्रायल कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरोपी ने यह अर्जी पहले क्यों नहीं लगाई। कोर्ट ने यह भी कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट CrPC की धारा 293 के तहत बिना औपचारिक प्रमाण के स्वीकार्य है।
कोर्ट ने रद्द कर दिया फैसला
जज ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही नहीं ठहराया जा सकता और उसे रद्द किया जाता है। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह 28 अगस्त 2024 और 3 सितंबर 2024 को निपटाए गए आवेदनों में मांगी गई विशेषज्ञ गवाह और अन्य गवाहों को बुलाए। उनके बयान कानून के अनुसार दर्ज करे और फिर मामले को अंतिम रूप से तय करे। इस अवलोकन और निर्देश के साथ, यह रिवीजन खारिज किया जाता है।
5 प्वॉइंट में समझिए पूरा केस
- 1: रीवा के सिरमौर स्थित ट्रायल कोर्ट ने पॉक्सो केस में आरोपी की गवाहों को बुलाने की अर्जी दो बार खारिज की थी।
- 2: निचली अदालत का तर्क था कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार पुराने केसों को 6 महीने में निपटाना अनिवार्य है, इसलिए अब प्रक्रिया को लंबा नहीं किया जा सकता।
- 3: अदालत ने धारा 293 CrPC का हवाला देकर कहा था कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट बिना औपचारिक सबूत के भी मान्य है।
- 4: हाई कोर्ट ने इस तर्क को पलटते हुए कहा कि न्याय की गुणवत्ता से समझौता सिर्फ इसलिए नहीं किया जा सकता कि केस पुराना है।
- 5: अदालत ने आदेश दिया कि 28 अगस्त और 3 सितंबर 2024 की अर्जियों के अनुसार गवाहों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जाएं।

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