रतलाम। 
रतलाम रावण दहन इस बार विवाद का कारण बन गया. नगर निगम द्वारा तैयार कराए गए रावण का दो-दो बार दहन करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों ही बार पुतला पूरी तरह से नहीं जल पाया. इस नजारे को देखने आए हजारों लोगों का उत्साह ठंडा पड़ गया और भीड़ ने मौके पर ही नगर निगम और महापौर प्रहलाद पटेल के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. लोगों ने आरोप लगाया कि हर साल रावण दहन परंपरा और भव्यता के साथ होता है, मगर इस बार भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल ने पूरे आयोजन को मजाक बना दिया. कई लोगों ने कहा कि नगर निगम ने जनता के पैसों से घटिया काम कराया है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा.
कैबिनेट मंत्री के सामने हुआ हंगामा
इस दौरान मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कैबिनेट मंत्री और रतलाम विधायक चैतन्य काश्यप भी पूरे घटनाक्रम के गवाह बने, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया दिए बिना चुपचाप मैदान से निकल जाना ही उचित समझा. जब महापौर प्रहलाद पटेल से इस लापरवाही को लेकर सवाल किए गए तो उनका गैरजिम्मेदाराना जवाब सामने आया.
महापौर ने कहा— “अगर रावण दो मिनट में जल जाए तो लोग तुरंत चले जाते हैं. लोग इंतजार करते रहे, लेकिन जो गलती हुई है, उसके लिए ठेकेदार को सजा दी जाएगी और उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा.”
महापौर की इस सफाई ने लोगों का गुस्सा और भड़का दिया. लोगों ने मैदान में ही नगर निगम और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इसे निगम के भ्रष्टाचार की खुली पोल बताया. आखिरकार देर रात हंगामे और अव्यवस्था के बीच रावण को नीचे गिराकर उस पर डीजल डालकर जलाया गया. लेकिन तब तक लोगों का उत्साह गुस्से और निराशा में बदल चुका था ओर लोग ग्राउंड छोड़ कर चले गए.