रायसेन में मंच से निकली ‘लाड़ला भांजा योजना’ की बात, शिवराज सिंह चौहान के बयान पर सियासी और सोशल हलचल तेज
रायसेन।
केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। ‘लाड़ली बहना योजना’ के बाद अब उन्होंने मजाकिया अंदाज में ‘लाड़ला भांजा योजना’ का जिक्र कर दिया, जिसने मंच से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का माहौल बना दिया है। दरअसल, शिवराज सिंह चौहान रायसेन जिले में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंच से जनता से संवाद के दौरान उन्होंने कहा, “यहां भांजे-भांजियां बैठे हैं। भांजे कह रहे थे कि मामा, लाड़ला भांजा योजना बना दो। मैं दोनों सरकारों से बात करूंगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग हंस पड़े और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। हालांकि, शिवराज सिंह का यह बयान कार्यक्रम तक ही सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर वीडियो और बयान वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने सरकार की मौजूदा योजनाओं को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि पहले ‘लाड़ली बहना योजना’ से वंचित रह गई महिलाओं के नाम जोड़े जाएं। वहीं, कई यूजर्स ने योजना की राशि बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग भी दोहराई। कुछ लोगों ने शिवराज सिंह को यह नसीहत दी कि वे केंद्रीय कृषि मंत्री होने के नाते किसानों के मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दें। इस कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव बहुत तेज गति से काम कर रहे हैं और उनमें उनसे कई गुना ज्यादा ऊर्जा है। शिवराज ने कहा कि प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी ऊर्जा जरूरी है और उन्हें भरोसा है कि मोहन यादव इसी तरह तेजी से काम करते हुए प्रदेश की बेहतर सेवा करेंगे। गौरतलब है कि ‘लाड़ली बहना योजना’ मध्यप्रदेश की सबसे चर्चित और प्रभावशाली योजनाओं में से एक रही है, जिसने राज्य की राजनीति में बड़ा असर डाला। ऐसे में ‘लाड़ला भांजा योजना’ का जिक्र भले ही मजाक में किया गया हो, लेकिन इसने एक बार फिर सरकारी योजनाओं, उनकी प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां इसे कोई हास्य के रूप में देख रहा है तो कोई इसे सरकार की नीतियों से जोड़कर गंभीर सवाल उठा रहा है।

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