• 15 गांवों में पानी भरा, 50 हजार लोग फंसे 
  • फसलें डूबीं, जानवर बदहाल

प्रयागराज। ‘हमारे पास 12 जानवर हैं। 4 दूध देते हैं इसलिए वह बाढ़ के बीच घर पर हैं बाकी सभी को घर से 4 किलोमीटर दूर एक बाग में रखा है। घर वाले जानवरों के लिए राशन सिर पर रखकर 7 किलोमीटर दूर से ला रहे हैं। क्योंकि बाढ़ के बीच गाड़ी चल नहीं रही है।’यह कहना है संतराम यादव का। यही स्थिति प्रयागराज के कछार में सैकड़ों किसानों की है, जहां 10 लाख शहरी आबादी बाढ़ से प्रभावित है। वहीं, गांवों में भी इतनी ही आबादी बाढ़ से बुरी तरह परेशान है। कोई इलाज नहीं करवा पा रहा, तो कोई नौकरी पर नहीं जा पा रहा। हजारों जानवर प्रभावित हैं। बहुत सारे लोगों को इलाज तक नहीं मिल पा रहा। प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था तो हुई, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही। 
मुख्य रास्तों पर 2 फीट से लेकर 5 फीट तक पानी भरा
यूपी में प्रयागराज बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है। जिले के कौड़िहार ब्लॉक का नरहा, दादनपुर, दानिशपुर, झिंगहा, सरांय, मुबारकपुर समेत 15 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। यहां की आबादी करीब 50 हजार है। ये गांव टापू में तब्दील हो चुके हैं। यहां तक जाने के मुख्य रास्तों पर 2 से लेकर 5 फीट तक पानी भर गया है।
यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। यहां जितने लोग हैं, उससे 4 गुना जानवर हैं। ऐसे में जब पानी बढ़ रहा था, तभी लोग अपने जानवरों को लेकर घर से करीब 4 किलोमीटर दूर चले गए। गांव में महिलाएं और बुजुर्ग बचे हैं।