ऑपरेशन टाइगर पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, शिंदे सेना ने उद्धव पर साधा निशाना
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के 'ऑपरेशन टाइगर' वाले बयान पर पलटवार करते हुए शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने कहा कि राज्य की जनता भली-भांति जानती है कि असली शेर कौन है और शेर की खाल में लोमड़ी कौन बनी घूम रही है। उन्होंने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि किस गुट को 20 सीटें मिलीं और किसे 60 सीटें, जिससे असली शिवसेना का पता चल चुका है।
'शेर दो कदम पीछे हटे तो समझो एकनाथ शिंदे आ रहे हैं'
राज्यसभा सांसद ज्योति वाघमारे ने उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बचाव करते हुए कहा कि जब जंगल में जानवर दो कदम पीछे जाता है तो समझ आता है कि शेर आ रहा है, लेकिन अगर खुद शेर दो कदम पीछे हट जाए तो समझ लेना चाहिए कि एकनाथ शिंदे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि धनुष-बाण चुनाव चिह्न शिवसेना की वास्तविक शान है। विधानसभा से लेकर नगरपालिका चुनावों के परिणामों ने सिद्ध कर दिया है कि एकनाथ शिंदे ही शिवसेना के असली शेर हैं।
उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और शिंदे के प्रभाव पर तंज
वाघमारे ने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता कल तक अपने घर से बाहर नहीं निकलते थे और मंत्रियों-विधायकों से मिलने से कतराते थे, वे आज दर-दर घूमकर हर किसी से मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह बदलाव एकनाथ शिंदे के कारण आए राजनीतिक डर की वजह से है, तो ऐसा डर होना लोकतंत्र में जरूरी और अच्छा है।
धनुष-बाण चुनाव चिह्न को 'फ्रीज' करने की मांग पर कानूनी जंग
इससे पूर्व, उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई का हवाला देते हुए मांग की थी कि जब तक पार्टी के नाम और पहचान पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न को जब्त (फ्रीज) किया जाना चाहिए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि पार्टी का नाम और निशान 'चुराने' वाले लोग उसी प्रतीक का इस्तेमाल कर अपनी सत्ता मजबूत कर रहे हैं, जिससे उनकी पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
'धनुष-बाण पर बोलने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं विरोधी'
उद्धव ठाकरे के बयानों का खंडन करते हुए सत्ताधारी गुट का कहना है कि चुनाव चिह्न को फ्रीज करने की बात करने वाले अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि विवाद खड़ा करने वाले लोग बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और धनुष-बाण पर बात करने का नैतिक अधिकार पूरी तरह से गंवा चुके हैं।

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