जल संसाधन में निभाई जा रही रिश्तेदारी...अधिकारी खुद की साइन से करवा रहे तबादले... मंत्री की तो जरूरत ही नहीं हैं हद हो गई
भोपाल, सबकी खबर।
जल संसाधन विभाग की एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दरअसल जल संसाधन विभाग में ऐसी भर्राशाही नहीं देखी होगी कि एक जिम्मेदार अधिकारी अपने रिश्तेदार का ट्रांसफर कराने के लिए तमाम सारे हथकंडे अपने डाले। अधिकारी कर्मचारियों से हस्ताक्षर अभियान चलवाता है और इन हस्ताक्षर अभियान के बाद में वे अधीक्षण यंत्री को इस बात के लिए विवश करते हैं कि आप चिट्ठी लिखिए मुझे ताकि मैं अपने हस्ताक्षर से अपने रिश्तेदार का तबादला कर दूं। मामला कूछ इस तरह है। दरअसल वैनगंगा कछार सिवनी में मुख्य अभियंता हैं अशोक कुमार डेहरिया। अशोक कुमार डेहरिया वैसे कार्यपालन यंत्री हैं मूलत लेकिन लंबे समय से प्रमोशन नहीं हुए हैं तो कई अधिकारियों को प्रभार दिया गया है। अशोक डेहरिया के बारे में एक बात बताते चले कि यह डेहरिया भोपाल के बडे प्रिय हैं। यानी मंत्री के प्रमुख सचिव के यहां के बड़े प्रिय हैं और इसी के कारण उन्हें दो जगह का मुख्य अभियंता बनाया है। ओरिजिनल पद एई का है। लेकिन चार्ज है उनके पास में वैनगंगा कछार रीवा का है। इनके एक रिश्तेदार हैं राम कुमार डेहरिया। राम डेहरिया आमीन हैं। और इनका कैसे तबादला हम जो है तिलवारा करा सके। इसके लिए उन्होंने बाकायदा कर्मचारियों से पत्र लिखवाए हैं। हस्ताक्षर अभियान चलाए। फिर अधीक्षण यंत्री पर दबाव डाला गया कि आप हमें पत्र लिख दीजिए। अधीक्षण यंत्री ने पत्र नहीं भेजा। उसके पहले ही यह जो अशोक डेहरिया ने अपने रिश्तेदार के ट्रांसफर का पत्र टाइप कर लिया। उसको आवक जावक भी करा दी। पहली बार ऐसा पत्र देख रहे होंगे। इसमें बाकायदा लिखा है रामकुमार डेहरिया का तबादला तिलवारा आवश्यक कार्य के लिए कर्मचारियों की मांग पर किया जा रहा है । इतनी अंधेरगर्दी मंत्री सिलावट इतनी अंधेरगर्दी हद हैं। विभाग का हेड कोई विभाग का प्रमुख नीचे के कर्मचारियों के कहने पर ट्रांसफर करेगा वह भी इसलिए कि वह रिश्तेदार है यह अशोक डेहरिया वो रामकुमार डेहरिया। इससे साफ होता है कि यह जल संसाधन विभाग में जमकर भर्राशाही है और इस तरह के तबादले पर इसलिए बैन लगना चाहिए क्योंकि यह अधिकार इनके पास नहीं है प्रभार देने का यह देना है तो मध्य प्रदेश भोपाल में जो वह ईएनसी बैठे हुए हैं प्रमुख अभियंता उनका अधिकार है। कुछ सुनने में आया है कि कुछ मेंटल है जैसी बड़ी कंपनियों के यह बहुत खास है। राजदार हैं। इसलिए ये इस तरह की सारी मतलब कहना चाहिए आगे जाके अधिकारों से बाहर जाके काम कर रहे हैं। यह बिल्कुल उचित नहीं है। जिस तरह की भर्राशाही है उसे उजागर करने का काम हमारा है और हम करते हैं पूरी ताकत से।

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