नई दिल्ली। 
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। इसको लेकर अब कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। अभिजीत दीपके ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। और यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं हैं, अगर आप लोग इस सरकार के सामने नहीं झुकते हैं, तो हम किसी का भी इस्तीफा स्वीकार कर सकते हैं। अभिजीत दीपके ने कहा, “डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना ही चाहिए। उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। और दूसरा, 20 तारीख को जिन पुलिसकर्मियों ने यह हरकत की, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। याद रखें, कॉकरोच से पंगा मत लो।”
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा। अपने इस्तीफे में धर्मेंद प्रधान ने कहा, “मैं चार दशकों से भी ज़्यादा समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा में सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव होती है।” धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा, “मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और जायज़ उम्मीदों का बहुत सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं।
मैंने पहले दिन से ही इसकी जिम्मेदारी ली- धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, “पहले दिन से ही मैंने इसकी ज़िम्मेदारी ली और कभी भी इस स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा। मेरा संकल्प था कि हम परीक्षा माफिया के कारण किसी भी होनहार छात्र का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे और न ही किसी छात्र के साथ अन्याय होने देंगे। 16 जुलाई को घोषित नीट यूजी के नतीजे संतोषजनक रहे, जिसमें वंचित पृष्ठभूमि के कई होनहार छात्रों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा करने और कई छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे मुझे बहुत दुख हुआ।”