क्या मुस्लिम उपराष्ट्रपति देकर मोदी विपक्ष के साथ कर देंगे खेला? बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सबसे प्रबल दावेदार
नई दिल्ली।
राजनीति में अक्सर कहा जाता है, “यहां कुछ भी संभव है." यह कहावत 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में सच साबित हुई थी, जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अचानक राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया. अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां चल रही हैं और एक बार फिर एनडीए और भारत गठबंधन अपनी-अपनी चाल चल रहे हैं, लेकिन बीजेपी एक बार फिर ऐसा कदम चल सकती है जिससे विपक्ष चौंक जाए. हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस फैसले ने राजनीति को हिलाकर रख दिया और अब उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं. भाजपा और एनडीए ने अपने उम्मीदवार के नाम को अंतिम रूप देने के लिए गहन बातचीत शुरू कर दी है. जराए के मुताबिक, बीजेपी संसदीय बोर्ड की एक अहम बैठक 17 अगस्त को होगी, जिसमें उम्मीदवार पर अंतिम मुहर लगेगी.
इन नामों पर चल रही महामंथन
बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. उनके अलावा, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और आरएसएस विचारक शेषाद्रि चारी के नामों पर चर्चा हो रही है. इनमें से आरिफ मोहम्मद खान का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है. अगर बीजेपी उन्हें उम्मीदवार बनाती है, तो यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश होगा.
क्या 2025 में इतिहास खुद को दोहराएगा?
अब सवाल यह है कि क्या बीजेपी 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में भी यही रणनीति अपनाएगी? अगर आरिफ मोहम्मद खान को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो यह न सिर्फ़ विपक्ष के लिए एक चुनौती होगी, बल्कि भाजपा की तरफ से एक कड़ा संदेश भी माना जाएगा. क्योंकि बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और प्रधानमंत्री मोदी एनडीए गठबंधन में कोई जोखिम नहीं लेना चाहेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि पीएम मोदी मुस्लिम कैंडिडेट देकर विपक्ष को चौंका सकते हैं. हालांकि, विपक्ष अब भी दुविधा में हैं. विपक्ष को लगता है कि अगर बीजेपी किसी मुस्लिम कैंडिडेट को मैदान में उतारती है, तो उसका खुलकर विरोध करना आसान नहीं होगा. यही रणनीति 2002 में भी काम आई थी, जब विपक्ष को कलाम के समर्थन में उतरना पड़ा था.

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