अफसरों की लापरवाही से प्यासा रह जाएगा मुख्यमंत्री का उज्जैन
शहर के एकमात्र जलस्रोत गंभीर डेम का जलस्तर गुरुवार को 162.97 एमसीएफटी रहा यानी फिलहाल शहरवासियों के लिए केवल 10 दिन के जलप्रदाय का पानी शेष है। अगर अब बेहतर बारिश नहीं हुई तो पीएचई द्वारा एक दिन छोड़कर भी जलप्रदाय करना मुश्किल हो जाएगा। यह समस्या अगस्त में सामने अा रही है लेकिन इसके कारण ताे सालों से प्रशासन और पीएचई के सामने हैं, जिन पर समय रहते काम न होने से आज शहर जलसंकट की दहलीज पर पहुंच चुका है।
बैठक में कहा- नर्मदा का पानी गऊघाट फिल्टर प्लांट में लाएं
निगम में गुरुवार को जलप्रदाय व्यवस्था के लिए आखिर अब बैठक रखी गई। इस दौरान महापौर और नवागत निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा एवं अधिकारियों की उपस्थिति में समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने गंभीर की क्षमता के साथ चैनल कटिंग के काम की जानकारी दी।
जेसीबी एवं पोकलेन मशीन से कैचमेंट एरिया के पानी को आगे लाया जा रहा है, ताकि उपयोग जलप्रदाय में किया जा सके। महापौर और आयुक्त ने नर्मदा लाइन के विषय के बारे में पीएचई के अधिकारियों से जानकारी ली और निर्देशित किया नर्मदा का पानी गऊघाट फिल्टर प्लांट में लाया जा सके, ताकि लोगों को नर्मदा का पानी मिल पाए।
लारवाही की प्यास...
- 1. 1991 में 3 लाख लोगों की क्षमता से बना गंभीर आज भी एकमात्र जलस्रोत
- दिसंबर 1991 में 2250 एमसीएफटी की क्षमता वाले गंभीर डेम का निर्माण किया गया। उस समय शहर की जनसंख्या 3 लाख 65 हजार थी। फिलहाल शहर के जनसंख्या 6 लाख से ज्यादा है और रोजाना लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं। शहर का विकास हुआ लेकिन जलस्रोत का नहीं, इसके चलते गंभीर की क्षमता अब शहर के लिए पर्याप्त नहीं।
- 2. नर्मदा की पाइपलाइन 2023 में डालना थी, अब तक काम नहीं करवा पाए अफसर
- नर्मदा की पाइपलाइन से गंभीर की रो-वाटर पाइपलाइन को जोड़ने का काम 2023 में शुरू हुआ था। भोपाल की कंपनी को 88 लाख रुपए में दो महीने में पाइपलाइन जोड़ने का काम दिया गया। लेकिन आज दो साल की गर्मी बीतने के बाद भी नर्मदा की पाइपलाइन नहीं जुड़ पाई। 1 साल से ठेकेदार ने भुगतान व साइट क्लियर नहीं होने से काम बंद रखा है। नर्मदा के पानी के लिए अनुमति नहीं ली।
- 3. पाइपलाइन सालों पुरानी, लीकेज से रोज 20 से 30 प्रतिशत पानी रिसाव हाे रहा
- शहर की पाइपलाइन को डाले कई साल हो गए हैं, जिसके चलते लीकेज बड़ी परेशानी है। जलप्रदान के दौरान 20 से 30 प्रतिशत पानी रिसाव के चलते ही बह रहा है। अन्य विभागों के निर्माण कार्य के दौरान भी आए दिन पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होती है।
- 4. उपकरणों का मेंटेनेंस नहीं, 11 पंप डेढ़ साल बंद रखे, ट्रांसफॉर्मर अब सही होकर आया
- गर्मी शुरू होते ही पंपों और ट्रांसफार्मरों को खराब होना शुरू होता है, क्योंकि पूरे साल मेंटेनेंस नहीं हो रहा। जिस कंपनी को मेंटेनेंस का काम दिया था, उसने भुगतान नहीं मिलने पर दो सालों तक काम बंद रखा। 11 पंप को बंद है, वहीं एक ट्रांसफॉर्मर तो अब सुधर कर आया है।
- 5. कैचमेंट एरिया से चोरी होती रही, कार्रवाई नहीं
- गंभीर के कैचमेंट एरिया व गांवों में आने वाले हिस्से में लोगों ने निडर होकर पंप लगाए और खेती की। सिंचाई में पानी का उपयोग हुआ लेकिन जिम्मदारों ने कभी फिल्ड में घूमकर कार्रवाई नहीं की, जबकि सभी विभागों के अधिकारियों को मिलाकर पानी की चोरी रोकने के लिए कमेटी बनती है।

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