कोल्हापुर वालों ने हथनी के लिए रैली नहीं निकाल दिया रैला , महादेवी के लिए सड़कों पर उतरा कोल्हापुर
भोपाल, सबकी खबर।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर से बडी ही चौंकाने वाली, मार्मिक और भावनात्मक खबर सामने आ रही हैं एक निरीह जानवर के लिए, एक ऐसे जानवर के लिए जो आंसू निकाल सकता है लेकिन ल नहीं सकता। उसके लिए पूरा शहर सड़क पर उतरा है। यह पूरे देश के इतिहास में संभवत पहली बार हुआ है। और यह जानवर है हथनी जिसका नाम है माधुरी। माधुरी को बड़े षड्यंत्र पूर्वक तरीके से मुकेश अंबानी का छोटा बेटा अनंत अंबानी अपने साथ ले गया है वनतारा में जो चिड़ियाघर बनाया हुआ है वहां और इस माधुरी को वापस लाने के लिए रविवार सुबह 5:00 बजे से कोल्हापुर की सड़कें जाम थी। सोचने वाली बात है। कोल्हापुर का जो नांदनी एक छोटा सा स्थान है जहां एक जैन मठ बना हुआ है। वहां से लेकर कोल्हापुर तक 25 कि.मी. तक वल और केवल इंसान दिखाई दे रहे थे। पैदल लोग जा रहे थे कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए। और यह ज्ञापन कोई सडक या कोई किसानों के मुआवज को लेकर नहीं था यह भीड का सैलाब था एक निरिह जानवर हाथिनी को लेकर। दरअसल मामला यह है कि कोल्हापुर के एक जैन मठ में यह है एक हथनी हैं जिसे लोग माधुरी तो कुछ लोग महादेवी भी बोलते है। जो पिछले तीस साल से इसी मठ में रह रही है। महादेवी बचपन से इसी मठ में रही है। यही बड़ी हुई है। यहां के जो भट्टारक हैं जिनसेन स्वामी जिन्होंने इसको पाल के अपनी बेटी की तरह पाल के बड़ा किया है। उनका यह दावा है कि जो हथनी है यह इंसान से ज्यादा संवेदनशील है। इंसान से ज्यादा समझदार है और इंसानों से ज्यादा धार्मिक भी है। उनका कहना है कि पिछले 30—35 साल में नांदनी में जितने भी धार्मिक उत्सव हुए हैं, चाहे वो जैनों में हुए हो या अन्य कहीं हुए हो। यह जो माधुरी है वह बढचढकर हिस्सा लेती थी सबसे आगे चलती थी। लोगों को हार फूल पहनाती थी। प्रणाम करती थी और इसके अलावा इसकी जो दैनिक दिनचर्या हैं वो सुन के तो आप दंग रह जाएंगे। सुबह जो माधुरी हाथी है वो वहां भगवान के सामने पहुंचती थी। वहां आदिनाथ भगवान की विशाल प्रतिमा है। वहां ये पहुंचती थी और उनके दर्शन करती थी। बाकायदा प्रणाम करती थी और उनका अभिषेक देखने के बाद ही भोजन करती थी। वहां के लोगों का यह भी दावा है कि माधुरी ने कभी रात्रि भोजन नहीं किया। जैन समाज के सारे नियमों को फॉलो करती थी । एक पशु जो इंसान नहीं है। बोल नहीं सकते हैं। वो इतना ज्यादा धार्मिक हो जाए और बड़ी बात यह है कि वहां यह बेटी की तरह रहती थी। किसी के पास भी पहुंच जाती थी खाने के लिए। मतलब आप सोचिए कि लोग उसे इतना प्यार करते थे कि हर परिवार के सदस्य की तरह रहती थी। लेकिन पिछले दो-ती साल से कुछ ऐसी समस्याएं आई क्योंकि उम्र संबंधी समस्याएं भी रहती हैं। तो पेटा ने मुंबई हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी के उसको ऑर्थोोटाइजिस हो गया है इसको इलाज की आवश्यकता है जो मठ में नहीं हो सकता तो उन्होंने कहा कि ठीक है इसको वनतारा को सौंप दिया जाए तो मठ के लोग हाई कोर्ट गए सुप्रीम कोर्ट गए और कहा कि नहीं हम इसको नहीं छोड़ सकते लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और 28 जुलाई को सुप्रीम
कोर्ट का फैसला आ गया। 30 तारीख को वन विभाग के अधिकारी वनतारा जो मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का निजी चिड़ियाघर है। वहां का पूरा स्टाफ गाड़ी के साथ इसको लेने वहां पहुंच गया। जब माधुरी को लेने के लिए यह टीम पहुंची तो नांदनी जैसे छोटे कस्बे में 10,000 लोग इकट्ठे हो गए। कुछ लोगों ने पथराव किया। कुछ लोगों ने आंसू बहाए। यहां के जो भट्टारक जी हैं जिनका नाम जिनसेन स्वामी है उन्होंने बाकायदा पुष्प वर्षा करके चावल छिड़क कर अपनी इस प्यारी माधुरी को विदा किया है और जिस समय यह विदा की जा रही थी स्वामी भी रो रहे थे और यह जो निरीह जानवर है ना ये बहुत समझदार होते हैं। इसकी आंखों में से भी आंसू बह रहे थे। बाकायदा इनका जो जो इनकी देखरेख करने वाले हैं वो अपने कपड़े से साथी की आंस आंसू पोंछ रहे थे। वो दृश्य देखकर लोग लोगों ने फसाद शुरू कर दिया था। आप सोचिए लोग इतने भावुक हो गए थे। फिलहाल जो महादेवी है माधुरी है यह वनतारा पहुंच चुकी है। लेकिन जैसे ही वनतारा पहुंची उसके अगले दिन वहां के कोल्हापुर के 10,000 से ज्यादा लोगों ने पहले ही दिन एक अपने मोबाइल से Jio की सिम निकाल कर फेंक दी। और बॉयकॉट Jio का एक हैशटैग शुरू कर दिया। एक वो पूरी मुहिम चला रखी है। और रविवार था नादनी से लेकर कोल्हापुर तक 25 कि.मी. की पद यात्रा निकाली गई। सुबह बजे पद यात्रा शुरू हुई और आप सोचिए इसमें लाखों की तादाद में लोग शामिल हुए। 25 किलोमीटर तक भीड़ ही भीड़ दिख रही थी। बाकायदा कलेक्ट्रेट कार्यालय में ज्ञापन देने गए हैं। और बड़ी बात यह है कि तमाम सारे जैन मुनि अब माधुरी को वापस लाने के लिए मुहिम चला रहे हैं। लोग सड़कों पर उतर आए। पूरा कोल्हापुर शहर एक हाथनी को वापस लाने के पूरा शहर सड़कों पर उतरा है। ये केवल एक आंदोलन नहीं है। ये भावनाएं हैं। ये प्यार है माधुरी के प्रति। ये निश्चित तौर पे आप देखेंगे तो आप भी भावुक होंगे। इस अत्यंत भावुक विषय को लेकर पहली बार किसी जैन मुनि आदित्य सागर जी को श्राप देते देखा है। उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं हुआ है। यह जो अंबानी का छोटा हाथी मतलब अंबानी का छोटा यानी अनंत अंबानी जो खुद मोटे हैं। उनके बारे में महाराज जी कह रहे हैं ये अंबानी का छोटा हाथी हमारे हाथी को ले गया है। ठीक नहीं हुआ है। एक बात और मुनि श्री ने कही है। वो वाकई विचारणीय है। कि एक हथनी के स्वास्थ्य को लेके इतना चिंतित और इसी अंबानी के अंबानी जीयो फ्रेश में गायों को काट काट के बेचा जाता है। तब इनकी आत्मा कहां जाती है? चाहे सरकार हो चाहे अंबानी जी का छोटा हाथी हो सबको हाय लगेगी। तुमको हाथी रखने का शौक है तुम ही रह लो ना वहां पर। भाई क्या दिक्कत है? और तुमको इतना शौक है जीव दया का जीव दया का इतने स्लॉटर हाउस तुम्हारे पिताजी ने मोदी जी के साथ खुलवाए उनको क्यों नहीं देखते भाई कभी तो वो नहीं देखा तुमने कि इतने स्लॉटर हाउस खुल गए तुमको उन्हीं की चिंता है। पूरा जैन समाज उद्वेलित है। पूरा आम समाज उद्वेलित है और सड़कों पर लोग उतरे हुए हैं। अब तो माधुरी को जब तक वापस नहीं ले आएंगे तब तक पूरा कोल्हापुर इस समय सड़कों पे और धीरे-धीरे यह आंदोलन बढ़ता जा रहा है। हो सकता है आज नहीं तो कल यह पूरा के पूरा महाराष्ट्र में फैल जाए। उसकी आंच मध्य प्रदेश की तरफ भी आए। उत्तर प्रदेश, राजस्थान मतलब पूरे देश भर में भी यह आंदोलन बढ़ सकता है। इसकी पूरी संभावना है। देखते हैं अब राज्य सरकार भारत सरकार इसमें क्या निर्णय लेती है। उसका जो अधिपत्य इस समय जो वनतारा को दिया गया है।

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