कोल्हापुर, सबकी खबर। 
महाराष्ट्र के कोल्हापुर का एक जो जैन  तीर्थ है जैन मठ है जो नादड़ी में है नादड़ी एक गांव है वहां की एक हथनी को  लेकर खबर थी। दरअसल इस मठ में यह हथनी  पिछले 30 साल से रह रही थी और बीमारी के बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस हथनी को इलाज के लिए  बनतारा जो अंबानी ग्रुप का अनंत अंबानी का चिड़ियाघर कह सकते हैं या  रेस्क्यू सेंटर कह सकते हैं वहां भेज दिया गया है और इसके नादनी से इसकी रवानगी के  बाद से वहां लोग आक्रोशित हैं। लोग सड़कों  पर उतर आए। रविवार को लगभग 5 लाख लोगों ने  45 कि.मी. की पद यात्रा कर कोल्हापुर के  कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। और इस पूरे 5  लाख लोगों में वहां सभी पार्टियों के सभी  राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। अब महाराष्ट्र सरकार इस हथनी को  वापस लाने के बारे में विचार कर रही है।  उन तरीकों को खोजा जा रहा है। सोचा जा रहा  है कि कैसे इस हथनी को वापस नादड़ी के जैन  मठ में वापस लाया जा सके क्योंकि लोग सड़कों पर हैं। क्योंकि लोग जिओ का  बहिष्कार कर रहे हैं। क्योंकि लोग अनंत अंबानी को गालियां दे रहे हैं। जितने भी जैन मुनि हैं श्वेतांबर  दिगंबर किसी भी संप्रदाय के वो लगातार महादेवी को वापस जैन मठ लाने की बात कर रहे हैं। क्योंकि वहां के जो जनप्रतिनिधि है  वो सड़कों पर उतर गए हैं। आम जनता सड़क पर  उतर गई है। तो आज खबर यह आ रही है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र  फडनवीस ने महाराष्ट्र के उन विधायकों की  बैठक बुलाई है जो उस क्षेत्र से आते हैं  कोल्हापुर और कोल्हापुर के आसपास के और उन विधायकों से चर्चा करने के बाद यह विचार  किया जाएगा कि इस हथनी को कैसे बनतारा से  वापस लाया जा सके। यहां ज्ञात हो कि यह जो हथनी है यह बहुत  ही संवेदनशील जानवर है। नांदडी के जैन मठ में वहां जो भट्टारक है जैन सेन स्वामी  उनकी देखरेख में यह बड़ी हुई है। यह तीन  साल की थी जब वहां आई थी और 30 साल से वहां रह रही है। इसकी जो दिनचर्या है वह भी अजीब है। सुबह  सबसे पहले यह उस समय भगवान के दर्शन करने जाती है वहां मठ में भगवान विराजमान है। वहां ये दर्शन करती है। अभिषेक भी देखती थी और लोग यह भी  बता रहे हैं कि वो रात्रि में भोजन नहीं  करती थी। जैन जो फिलॉसफी है जैन जो सिद्धांत है उन्हें फॉलो करती थी। एक जानवर जैन सिद्धांतों को फॉलो करता है। यह  अपने आप में बड़ी बात थी। आचार्य विश्व सागर जी महाराज उन्होंने अपने प्रवचन में बड़े भावुक होकर कहा था कि हथनी जैन मुनियों को पहचानती थी और जैन  मुनियों को देख के बड़ी खुश होती थी। अपनी सूड ऊपर करके उन्हें नमस्कार करती थी। यह विश्व सागर जी महाराज ने खुद कहा है। वे बड़े भावुक थे बोलते समय। तमाम सारे मुनियों के रोज प्रवचन आ रहे हैं और वे चाहते हैं कि माधुरी को नादड़ी मठ में मठ में लाया जाए और यदि आवश्यकता होगी तो जैन समाज उसकी उचित उपचार की व्यवस्था करने तैयार है। डॉक्टरों की टीम रखनी होगी तो भी तैयार है। उसके लिए कोई विशिष्ट स्थान बनाना होगा तो उसके लिए तैयार हैं। क्योंकि नादड़ी वहां जाने से जाने के बाद खुश नहीं होगी। यह तय है। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था क्योंकि वन्य प्राणियों  से संबंधित संस्था है पेटा। पेटा ने पहले  इस हथनी के इलाज के लिए हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने कहा कि नहीं ठीक है इसके उपचार के लिए इसको वहां से हटाया जाए।  28 जुलाई को हाई कोर्ट का आर्डर आया और 30 जुलाई या 31 जुलाई को हाथी को लेने के लिए पूरी टीम वन विभाग की टीम वनतारा की टीम वहां पहुंच गई थी। जिस समय इस हथनी को वहां से ले जाया जा रहा था 10,000 लोग इकट्ठे हो गए थे  आसपास के और  ऐसा भावुक दृश्य था कि जो जो भट्टाचार्य हैं जिनसेन स्वामी वे रो पड़े थे और हाथी पर बायकादा पुष्प  वर्षा करके उसे सजा के रवाना किया गया था। लोग इतने गुस्से में थे कि लोगों ने पथराव  तक किया टीम के ऊपर। फिलहाल उस माधुरी हथनी को  इस समय बनतारा में रखा गया है। गुजरात के  बनतारा में यह अनंत अंबानी का है। लेकिन  लोग जो सड़कों पर उतरे हुए कोल्हापुर के  क्योंकि यह कोल्हापुर की एक ऐसी संवेदनशील हथनी है कि लोग इसे प्यार करते थे। इसके  दर्शन करने जाते थे। इससे आशीर्वाद लेने  जाते थे वहां नादड़ी में।