विधायक अंबरिश शर्मा की फर्जी स्क्रिप्ट पर चला कानूनी हथोड़ा
भिण्ड।
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के विधायक अंबरीश शर्मा के साले सुधांशु द्विवेदी जिन पर एक महिला से बलात्कार का  आरोप है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन्हें  14 अगस्त के पहले वापस मुंबई जेल भेजा  जाए। 14 तारीख तक मुंबई जेल भेजकर कोर्ट को सूचित भी किया जाए। दरअसल लहार से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं अंबरीश शर्मा और इनके साले हैं  सुधांशु द्विवेदी। सुधांशु द्विवेदी 97 करोड़ के घपले घोटाले के आरोप में मुंबई  की जेल में बंद थे। उन पर उन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया था और जेल में डाल रखा था। ऐसा कहा जा रहा है और यह आरोप कांग्रेस के  पूर्व विधायक गोविंद सिंह का है। उनका यह आरोप था कि मुंबई में  सुधांशु द्विवेदी को जेल में वो सुविधाएं  नहीं मिल पा रही थी जो मध्य प्रदेश की जेल  में मिल सकती थी। और यही कारण है कि एक  पूरी स्क्रिप्ट बनाई गई। एक रचना  रची गई। ग्वालियर की एक महिला से एफआईआर  कराई गई लहार थाने में के जेल जाने से पहले सुधांशु ने उनके साथ बलात्कार किया है और इस एफआईआर के बाद लहार थाने के जो थाना प्रभारी है रविंद्र शर्मा वे दौड़े भागे मुंबई जेल गए और सुधांशु को मध्य प्रदेश ले आए बाकायदा उन्हें अस्पताल में रखा गया पूछताछ की गई तमाम सारी चीजें की गई लेकिन कोर्ट 28 जुलाई को यह कह चुका है  क्या इनको मध्य प्रदेश में इनकी आवश्यकता नहीं है? इन्हें वापस मुंबई जेल भेज दिया जाए। जिस जेल से लाए गए हैं वहां वापस भेज दिया जाए। लेकिन उपचार के नाम पर ग्वालियर के बड़े अस्पताल जयारोग्य अस्पताल मेंं भर्ती रखा गया। इसके बाद में कोर्ट  ने बड़ा सख्त आदेश दिया था। 8 तारीख को। कोर्ट ने कहा था कि जो भी रिपोर्ट है हमें तत्काल दी जाए। इनका एक पांच बड़े  डॉक्टरों से परीक्षण कराया जाए। उनकी रिपोर्ट सबमिट की जाए और सोमवारको अस्पताल के डॉक्टरों  की टीम ने परीक्षण किया था और कोर्ट को अपनी रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के अध्ययन के बाद कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसी कोई दिक्कत नहीं है कि इन्हें मुंबई तक शिफ्ट ना किया जा सके। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि उपरोक्त रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्त को प्रतििवेदन में वर्णित सुविधाओं के साथ समुचित एवं सुरक्षित उपचार की व्यवस्थाओं को दृष्टिगत रखते हुए आर्थर रोड जेल मुंबई भेजे जाने में अभियुक्त के जीवन पर कोई जोखिम होना दर्शित नहीं होता। यह मेडिकल रिपोर्ट में आ गया है। उक्त प्रतििवेदन से यह भी स्पष्ट है कि  अभियुक्त किसी मेडिकल ऑफिसर की निगरानी से एंबुलेंस के माध्यम से जयारोग्य अस्पताल ग्वालियर से मुंबई भेजा जा सकता है। इसी आदेश में आगे कहा गया है कि अतः इस संबंध में प्रतििवेदन के निष्कर्ष को दृष्टिगत रखते हुए थाना प्रभारी लहार रविंद्र शर्मा एवं जेएएएच ग्वालियर को निर्देशित किया जाता है कि अभियुक्त को जेए एएच ग्वालियर द्वारा प्रदत्त प्रतिवेदन के अनुसार चिकित्सीय उपकरणों से सुसज्जित एंबुलेंस एवं आवश्यक दवाइयों दवाइयों तथा सुरक्षा घाट के साथ ले जाकर अभ्यक्त अभियुक्त को आर्थर रोड जेल मुंबई में दाखिल कराए जाना सुनिश्चित किया करें। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि प्रशासनिक स्तर पर एंबुलेंस में प्रतििवेदन में बताए  अनुसार संपूर्ण व्यवस्थाओं को दृष्टिगत संपूर्ण व्यवस्थाओं को व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें।  कोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया जाता है कि एंबुलेंस की व्यवस्था कराने हेतु जेए यानी जय आरोग्य अस्पताल ग्वालियर यदि चाहे तो जिला कलेक्टर भिंड से संपर्क कर एंबुलेंस की व्यवस्था करें। पुलिस अधीक्षक भिड एवं कलेक्टर भिंड को निर्देशित किया जाता है कि अभियुक्त को फरार होने से रोकने हेतु  सुरक्षार्थ व्यवस्था कर अभियुक्त को मुंबई दाखिल करना  सुनिश्चित करें। मतलब टोटल अब कोर्ट ने फाइनल आर्डर निकाल दिया कि आप इनको मुंबई भेजें। यह रास्ते में फरार ना हो जाए।  इनकी दवाइयों की व्यवस्था भी करें। आगे इसी आदेश में लिखा है जय आरोग्य अस्पताल जे एए ग्वालियर को निर्देशित किया जाता है कि प्रतििवेदन की खंडिका दो के अनुसार किसी वरिष्ठ चिकित्सय अधिकारी के साथ अभियुक्त को का आर्थिक रो आर्थर रोड जेल मुंबई में दाखिल किया जाना सुनिश्चित करें। बीएमओ लहार को यह निर्देशित किया जाता है कि इंसुलिन दिए जाने हेतु अपने एक नर्सिंग स्टाफ का होना सुनिश्चित करें। एक सख्त आदेश में अंडरलाइन किया है उसमें स्पष्ट किया है कि अभियुक्त को जेए ग्वालियर से सुरक्षित संसाधनों के साथ मुंबई जेल पहुंचाने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी थाना प्रभारी लहार एवं जेएच की होगी। मतलब क्लियर कर दिया है कि आपको तत्काल इनको रवाना करना है। अभियुक्त सुधांशु द्विवेदी  को यदि अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता हो तो  उक्त उपचार की संपूर्ण जिम्मेदारी जेल अधीक्षक आर्थर रोड जेल मुंबई के निर्देश अनुसार पूर्ण की जाए। अब मध्य प्रदेश की कोई जिम्मेदारी नहीं है। कोर्ट ने कह दिया है कि अब आर्थर रोड जो जेल है मुंबई की वहां के अनुसार ही आगे का इलाज होगा। उक्त आदेश की पालना में किसी प्रकार की चूक होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध न्यायालय के आदेश के अवमानना की अवलना की कारवाई की जाएगी। अवमानना की कारवाई की जाएगी।