सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में फंसे BJP विधायक संजय पाठक, पीड़िता की पहचान उजागर करने पर हो सकती है 2 साल की जेल
कटनी/भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर और अरबपति विधायक संजय पाठक एक बड़ी कानूनी मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं। चुनावी क्षेत्र में अपनी 'मसीहा' वाली छवि चमकाने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश में विधायक जी ने एक ऐसा संगीन अपराध कर दिया है, जिसके लिए उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 72 के तहत दो साल तक की जेल की सजा हो सकती है। यह मामला उनके किसी व्यवसाय या पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के उस सख्त कानून के उल्लंघन से जुड़ा है जो किसी भी दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने को एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध मानता है।
क्या है पूरा मामला?
विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत उर्फ शेरा मिश्रा नाम के एक व्यक्ति पर एक महिला के साथ दुष्कर्म (बलात्कार) करने का आरोप लगा है। आरोपी शेरा मिश्रा खुद को पत्रकार बताता है और सोशल मीडिया पर विधायक संजय पाठक को अपना 'भगवान' मानते हुए उनकी अंधभक्ति के वीडियो पोस्ट करता रहा है। जब पीड़िता ने कटनी के महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई, तो आरोपी को बचाने के लिए शुरू में राजनीतिक दबाव डाला गया, लेकिन मीडिया और जनता के दबाव के बाद पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े। इसी बीच न्याय की गुहार लगाने के लिए पीड़िता के ससुर और गांव के कुछ लोग विधायक संजय पाठक के पास पहुंचे थे।
विधायक संजय पाठक से कहाँ हुई बड़ी चूक?
संजय पाठक ने इस संवेदनशील मामले को सुलझाने और अपनी पीठ थपथपाने के लिए एक वीडियो रिकॉर्ड करवाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो में उन्होंने पीड़िता के ससुर को अपने बगल में खड़ा किया।उनका चेहरा साफ तौर पर दिखाया। पीड़िता के ससुर का नाम, उनका गांव और उनकी जाति को सार्वजनिक रूप से बोलकर उजागर किया। आरोपी शेरा मिश्रा को 24 घंटे के भीतर सरेंडर करने की धमकी दी।
कानूनी पहलू
भले ही विधायक संजय पाठक वीडियो में आरोपी को पकड़वाने और न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं, लेकिन पीड़िता के ससुर की पहचान, नाम और गांव उजागर करके उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उस दुष्कर्म पीड़िता की पहचान पूरी दुनिया के सामने ला दी है, जो कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सीधा उल्लंघन है।
BNS की धारा 72 और सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन
भारत के कानून और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म पीड़िता की पहचान (या उसके परिवार के जरिए उसकी पहचान) किसी भी परिस्थिति में उजागर नहीं की जा सकती। इस कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को 2 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। कानूनन इस मामले में किसी लिखित शिकायत की भी जरूरत नहीं है; पुलिस को खुद संज्ञान (Suo Motu) लेकर विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी होगी।
अतीत का उदाहरण: जब अखबार के मालिक पर हुई थी एफआईआर
इस मामले की गंभीरता को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि कुछ समय पहले भोपाल में 'दैनिक भास्कर' अखबार में एक ऐसी ही खबर छपी थी जिससे पीड़िता की पहचान उजागर हो रही थी। जयपुर के एक वकील ने उस खबर को पढ़कर वहां के थाने में अखबार के मालिक और रिपोर्टर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था, जिसे बाद में एमपी नगर थाने ट्रांसफर किया गया। जब अनजाने में हुई गलती पर अखबार के मालिक पर एफआईआर हो सकती है, तो यहाँ तो विधायक संजय पाठक ने जानबूझकर, खुद वीडियो में बोलते हुए इस कृत्य को अंजाम दिया है।
आरोपी 'शेरा' पर पुलिस की कार्रवाई
विधायक के कथित खास और खुद को उनका 'छर्रा' बताने वाले आरोपी शेरा मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें पुलिस उसे हथकड़ी लगाकर जेल ले जा रही है। विधायक जी भले ही अब उससे पल्ला झाड़ रहे हों, लेकिन वीडियो के जरिए जो अपराध वे खुद कर बैठे हैं, उसने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बड़ा सवाल: क्या सत्ता पक्ष के विधायक पर होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल देश की न्याय व्यवस्था और मध्य प्रदेश पुलिस पर खड़ा होता है। क्या नया कानून (BNS) सिर्फ विपक्ष या आम जनता के लिए है, या फिर सत्ताधारी दल के इस अरबपति विधायक पर भी कानून का चाबुक चलेगा? यदि पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं करती है, तो देश के किसी भी कोने से कोई भी नागरिक इस वीडियो के आधार पर संजय पाठक के खिलाफ 'जीरो एफआईआर' (Zero FIR) दर्ज करा सकता है।

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