'जली नकदी' मामले में जांच प्रक्रिया को दी थी चुनौती

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादले से पहले दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आवासीय परिसर से बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस 'जली नकदी विवाद' की जांच प्रक्रिया को चुनौती दी थी। हालांकि, कोर्ट में उनकी याचिका खारिज हो गई। जानिए शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा?
जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। जली हुई नकदी बरामद होने के मामले में जांच प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का आचरण विश्वास पैदा नहीं करता, इसलिए उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। इस अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ये भी माना कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो पत्र भेजा, वह असंवैधानिक नहीं था।

क्या है पूरा मामला, समझिए
बता दें कि ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब फरवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने पर, उन्हें सरकारी कर्मचारी और दमकल आग बुझाने आए थे। इस दौरान वहां एक कमरे में बहुत बड़ी मात्रा में जला हुआ या आधा जला हुआ नोट पाया गया।  इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की। साथ ही, इन‑हाउस इन्वेस्टिगेशन (अंदरूनी जांच) शुरू करने का निर्णय लिया गया। 
जांच से क्या सामने आया?
वहीं मामले में जांच पैनल ने पाया कि नोट्स एक ऐसे स्टोअर रूम में पाए गए थे, जो केवल न्यायाधीश के आवास का हिस्सा था और उसमें उनकी या उनके परिवार की पहुंच नहीं थी। पैनल ने इस घटना को गंभीर मानते हुए अध्यक्षता में ट्रांसफर से बढ़कर कार्रवाई की सिफारिश की, और यह रिपोर्ट राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को भेजी गई।