जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन के विदाई समारोह में उनका शायराना अंदाज देखने को मिला. हाल ही में जस्टिस श्रीधरन का जबलपुर हाईकोर्ट से इलाहबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर हुआ है. इसके बाद उनका विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें जस्टिस श्रीधरन ने उर्दू की नज्म और राहत इंदौर के प्रसिद्ध शेर पढ़कर सभी को चौंका दिया. इस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित कई जस्टिस और सीनियर एडवोकेट मौजूद थे.
जो साहिबे-मसनद हैं, वो कल नहीं होंगे
अपने विदाई समारोह के दौरान भावुक होकर जस्टिस अतुल श्रीधरन बोले, '' जो आज साहिब-ए-मसनद हैं कल नहीं होंगे, किराएदार हैं.. जाती मकान थोड़ी हैं.'' माना जा रहा है कि इस शेर के जरिए जस्टिस श्रीधरन अपने ट्रांसफर पर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने जीवन की अनिश्चितता को दर्शाया. इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर के बाद हाईकोर्ट में उनका विदाई समारोह रखा गया था, जिसका वीडियो गुरुवार को सामने आया है.
7 महीने में 3 बार ट्रांसफर हुए जस्टिस श्रीधरन
जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेटी के हाईकोर्ट में वकालत शुरू करने के बाद हितों के टकराव के चलते खुद जस्टिस श्रीधरन ने मध्य प्रदेश के बाहर ट्रांसफर का अनुरोध किया था. 2023 में उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय स्थानांतरित किया गया. फिर उन्हें वापस मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ट्रांसफर किया गया. 7 महीने में उनका ये तीसरा ट्रांसफर है.
चीफ जस्टिस का धन्यवाद, यहां अच्छा समय गुजरा : जस्टिस श्रीधरन
विदाई समारोह में जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि मैं चीफ जस्टिस का धन्यवाद करता हूं, कि उनकी वजह से मैं यहां पर अच्छा समय गुजार पाया. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा जी, बहुत ही नम्र व्यक्ति हैं, और सभी से तालमेल बनाकर चलते हैं. मैं अपने दूसरे साथी न्यायाधीशों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मेरी हमेशा मदद की.
'ट्रांसफर होते रहना तो काम का हिस्सा है'
विदाई समारोह के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने भावुक होकर अपने गुरु गोपाल सुब्रमण्यम और सत्येंद्र कुमार व्यास का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन्हीं की वजह से वे जज बने. उन्होंने यह भी कहा कि एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होना सर्विस का एक हिस्सा है. अब मैं जबकि इलाहबाद जा रहा हूं, तो देश के सबसे बड़े हाईकोर्ट में काम करने के लिए भी बहुत उत्साहित हूं. मुझे और भी सीखने मिलेगा.
'हिंदू आपस में लड़कर न हो जाएं अस्तित्वहीन'
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने हाल ही में दमोह पैर धुलाई कांड पर स्वत:संज्ञान लेते हुए कई कड़ी टिप्पणी की थी. इस मामले में उन्होंने सुनवाई को दौरान कहा था कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी अपनी स्वतंत्र पहचान का दावा कर रहे हैं. यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो डेढ़ सदी के अंदर खुद को हिंदू कहने वाले लोग आपस में लड़कर अस्तित्वहीन हो जाएंगे.