'4 फीट गहरे गड्ढे खोदो फिर नीम के 10 पेड़ लगाओ', हत्या के आरोपी को कोर्ट का 'अनोखा' आदेश, उम्रकैद की मिली थी सजा
जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को अनोखी सजा दी है। अदालत ने मर्डर के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया। आरोपी 10 साल से ज्यादा समय तक हिरासत में रह चुका है। कोर्ट ने अपीलकर्ता से कहा कि वह हिंसा के विचार का प्रतिकार करने के लिए 10 नीम के पौधे लगाए और उनकी देखभाल करे। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने कहा कि ये निर्देश एक पायलट पहल का हिस्सा हैं, ताकि “प्रकृति के साथ सृजन और सामंजस्य के माध्यम से हिंसा और बुराई के विचार का मुकाबला किया जा सके।” कोर्ट ने कहा, “वर्तमान में, करुणा, सेवा, प्रेम और दया जैसे गुणों को मानव अस्तित्व के जरूरी तत्वों के रूप में विकसित करने की जरूरत है, जीवन की रक्षा के लिए इन्हें पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। यह प्रयास केवल एक पेड़ लगाने के बारे में नहीं है, बल्कि एक विचार का बीज बोने के बारे में है।
कोर्ट ने बताया क्यों दे रहे हैं जमानत
दरअसल, आरोपी मनीष शर्मा को हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने अजीवन कारावास की सजा दी थी। वह करीब 10 साल से ज्यादा समय से जेल में है। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को 2021 में चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। आरोपी ने अपनी याचिका में सजा को निलंबित करने और जमानत की मांग की थी।
आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अगर वह 50,000 रुपये का जमानत बांड और दो गारंटरों के साथ हाजिर होने का वादा करता है, तो उसे जमानत मिलेगी और सजा को अपील के निपटारे तक स्थगित किया जाएगा। कोर्ट ने कहा- “यह स्पष्ट किया जाता है कि सजा के निलंबन के माध्यम से यह जमानत तब दी जाती है जब जमानत के लिए मामला बनता है और उसके बाद पौधे लगाने का निर्देश दिया जाता है और यह ऐसा मामला नहीं है जहां कोई व्यक्ति सामाजिक उद्देश्य की सेवा करने का इरादा रखता है, उसे गुण-दोष पर विचार किए बिना जमानत दी जा सकती है।”
लगाने होंगे नीम के पेड़
कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जमानत तभी मिल सकती है जब वह 10 नीम के या फलदार पेड़ लगाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पेड़ों की ऊंचाई 6-8 फीट हो और गड्ढे 3-4 फीट गहरे हों, ताकि पेड़ जल्दी बड़े हो सकें। आरोपी को इन पेड़ों की देखभाल करनी होगी। पेड़ लगाने के 30 दिनों के अंदर उनकी फोटो कोर्ट में जमा करनी होंगी। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को इन पेड़ों की निगरानी करने का निर्देश भी दिया।

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