इंदौर, सबकी खबर।
मध्यप्रदेश में अभी फिलहाल जो वातावरण बना हुआ हैं उसे आप प्रशासनिक निरंकुशता कह सकते हैं वरिष्ठ अधिकारियों की देखा देखी निचले क्रम के नए नवेले अधिकारी भी भ्रष्टाचार और लापरवाही में आकंठ डूबे नजर आ रहे हैं। ताजा मामला शाजापुर जिले के शुजालपुर तहसील से कालापीपल से जुड़ा है। यहां ज्ञात हो कि पूरा जिला इस समय महिलाशक्ति के हाथों में है शाजापुर की कलेक्टर हैं रिजू बापना। पहले नरसिंहपुर कलेक्टर थी अब शाजापुर में पदस्थ है। अब मामला कुछ यूं है कि शाजापुर के ही शुजालपुर में एक और महिला अधिकारी हैं जिनका नाम अर्चना कुमारी है जो अभी शुजालपुर एसडीएम है। इनके बारे में अगर लोगों की राय मानें तो अर्चना कुमारी अपनी पहली या दूसरी पोस्टिंग में ही भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने में लगी है। खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाती हैं खास बात तो यह भी हैं कि मुख्यमंत्री ने तक इनकी जांच के आदेश दिए हुए हैं। ईओडब्ल्यू ने भी पत्र लिखा है। कलेक्टर को इनकी जांच करें और अब तो हाई कोर्ट ने इनके द्वारा कराई गई एफआईआर को ही रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा इन्हें अधिकार ही नहीं था एफआईआर कराने का। 
अर्चना का कारनामा: 30 को नोटिस दिया 28 को ले देकर छोड़ दिया 2 पर एफआईआर करा दी
मामला यह है कि अर्चना कुमारी ने शुजालपुर में कथित तौर पर बिल्डरों के ऊपर शिकंजा कसना शुरू किया। शुजालपुर के  कालापीपल में 30 कॉलोनियों को बाकायदा नोटिस दिए। नोटिस में कहा गया था कि नियम विरुद्ध कॉलोनियां बनी है। लेकिन मजेदार बात यह है कि 30 कॉलोनियों को नोटिस दिए इसमें से 28 कॉलोनियों को मात्र 5000— 7000 और 10 हजार फाइन लगाकर नियमों को सही कर दिया मैडम ने और दो कालोनियोे के खिलाफ सीधी एफआईआर करा दी। जो कि उनका अधिकार क्षेत्र नहीं हैं यह आदेश कोर्ट ने भी जारी कर दिए। इसकी शिकायत एक शिकायत मुख्यमंत्री को भी की गई थी और इसमें साफ-साफ लिखा है कि अर्चना कुमारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है उन्होंने पद का दुरुपयोग करके भ्रष्टाचार किया। सीएम और ईओब्ल्यू में शिकायत भी हुई है। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि 30 कॉलोनियों को नोटिस दिए। यदि कारवाई होनी थी तो 30 के खिलाफ होनी थी। लेकिन इन्होंंने दो के खिलाफ एफआईआर कराई और 28 को कुछ ले देकर नियमों को सही कर दिया। अब इसमें बड़ी मजेदार बात यह है कि वहां जो नगर पंचायत के जो अध्यक्ष हैं  भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं जयप्रकाश अग्रवाल उनकी पत्नी नीना की भी इसमें कॉलोनी है। इनको भी एसडीएम मैडम ने नोटिस दिया था और नई नवेली अधिकारी मैडम का मामला यही गड़बड़ हो गया। इनकी शिकायत तो सीएम और ईओडब्ल्यू में हो रखी थी। तो इनके जांच के आदेश भी निकल गए। जांच का जिम्मा शाजापुर कलेक्टर रिजू बापना को सौंपा गया वह मैडल इनसे भी ज्यादा तेज निकली चंद दिनों में जांच भी कर ली और क्लीन चिट भी दे दी। जबकि प्रदेश में यह सर्वविदित सत्य है कि एक आईएएस दूसरे आईएएस को बचाने की भरसक कोशिश करता रहा हैं प्रदेश में ऐसे एक नहीं अनगिनत उदाहरण देखने को मिल सकते है। यहां समझने वाली बात यह है कि यह मान लेते हैं कि अर्चना कुमारी नई अफसर हैं उनको नियमों की जानकारी नहीं रही होगी लेकिन एक जिले की कलेक्टरी संभाल रही रिजू बापना को भी क्या इतना कानून का ज्ञान नहीं था कि उन्होंने अर्चना कुमारी को क्लीन चिट दे दी। अब यह मामला सीधे इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। 
हाईकोर्ट ने कहा यह आपका अधिकार क्षेत्र नहीं हैं
इंदौर हाई कोर्ट में यह मामला पहुंच गया और यह कहा गया कि यह एफआईआर बिल्कुल गलत कराई गई है। जो नगर पालिका अधिनियम 2021 की धारा 339 (गा) दो है जिसके तहत यह कारवाई की गई है। इसमें एसडीएम को अधिकारी नहीं है। इंदौर हाई कोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा ने इसकी सुनवाई की और उनके आदेश में साफ-साफ लिखा है कि एसडीएम को अधिकार नहीं है। कलेक्टर को अधिकार है, एडिशनल कलेक्टर को अधिकार है। और बड़ी बात यह है कि इसमें कहीं भी कलेक्टर को यह अधिकार नहीं है कि अपने अधिकार एसडीएम को दे सके। तो इसमें कारवाई करने का अधिकार एफआईआर कराने का अधिकार कलेक्टर को था। लेकिन एसडी एफआईआर किसने कराई एसडीएम ने। इसलिए जस्टिस प्रणय वर्मा ने यह दोनों एफआईआर रद्द कर दी। अर्चना मैडम ने आंख बंद करके एफआईआर कराई। अब क्या ऐसा नहीं है कि यह  अर्चना मैडम के एसीआर में लिखा जाए। आप आईएएस हैं। आपको मोटी तनख्वाह मिलती है मध्य प्रदेश के खजाने से। आपको बंगला, गाड़ी, सुख सुविधाएं इसलिए नहीं दी जाती कि आप नियम तरीके से काम करें।  हाई कोर्ट ने जो आर्डर दिया है, इसे निश्चित तौर पे रिजू बापना जो कलेक्टर है उनकी सीआर में भी लिखा जाना चाहिए और अर्चना कुमारी की भी सीआर में लिखा जाना चाहिए। अब यह जीएडी को तय करना है कि आपने आईएएस तैनात तो कर दिए लेकिन उन्हें नियमों का जरा भी ज्ञान नहीं है। या तो इनकी ट्रेनिंग दोबारा होनी चाहिए। या तो इन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।