इंदौर। 
सोमवार को ड्रेनेज चैंबर की जहरीली गैस से दो सफाई कर्मचारियों की मौत ने नगर निगम के उस दावे के पोल खोल दी, जिसमें अफसर व जनप्रतिनिधि दावा करते हैं कि इंदौर में रोबोट से ड्रेनेज चैंबर की सफाई होती है और यहां कोई भी कर्मचारी ड्रेनेज चैंबर में नहीं उतरता है।निगम के अफसर दावा करते हैं कि मशीनों से ड्रेनेज चैंबर की सफाई होती है। ड्रेनेज कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए नगर निगम ने कैमरे, गैस डिटेक्टर सहित अन्य सुरक्षा साधनों की खरीदी पर लाखों रुपये खर्च किए।
सुरक्षा के साधन जोनल कार्यालयों में, उपयोग बहुत
हकीकत यह है कि सुरक्षा के ये साधन निगम के जोनल कार्यालयों में रखे हुए हैं। इनका उपयोग भी बहुत कम ही होता है। चोइथराम मंडी के पास ड्रेनेज चैंबर में पाइप निकालने जाने के बजाए यदि कर्मचारियों ने जोनल कार्यालय से सुरक्षा साधन वाली टीम को बुलाया होता तो यह हादसा नहीं होता।
मेन लाइन में खाली करते हैं टैंकर
शहर में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान डिवाटरिंग वाहन में सीवरेज का पानी एकत्र कर उसे कबीटखेड़ी सहित शहर के अन्य सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में खाली करने का नियम है। हकीकत यह है कि ड्रेनेज विभाग के निगमकर्मी सेप्टिक टैंक से सीवरेज का पानी लेकर आसपास की ही किसी सीवरेज की मेन लाइन में छोड़ देते हैं। एसटीपी तक जाने की मशक्कत से बचने के लिए अक्सर इस तरह की प्रक्रिया को अपनाया जाता है। चोइथराम मंडी क्षेत्र में भी इसी प्रक्रिया के तहत डिवाटरिंग वाहन को खाली किया गया था। शहर में करीब 300 सुलभ कांप्लेक्स में से कुछ एक ही ऐसे हैं, जो सीवरेज लाइन से नहीं जुड़े हैं। ऐसे में इनके सेप्टिक टैंक को डिवाटरिंग वाहन के माध्यम से खाली किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने 30-30 लाख के मुआवजे का एलान किया
सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 में सीवर संबंधी मृत्यु होने पर 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का निर्णय दिया था। इसी आधार पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30-30 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया है।