इंदौर।
धार के ऐतिहासिक भोजशाला के भविष्य पर एक अहम सुनवाई सोमवार से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में शुरू हो रही है। इस सुनवाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 98 दिन की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पहली बार खोली और सार्वजनिक की जाएगी। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
यह मामला जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच सुन रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया था कि इस मामले की सुनवाई एक डिविजन बेंच करे, जिसमें मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल हों। यह आदेश 'मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी बनाम हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' मामले में आया था।
ASI के एक्सपर्ट्स ने किया सर्वे
इससे पहले, 11 मार्च 2024 को एमपी हाई कोर्ट ने ASI को इस संरक्षित ऐतिहासिक स्थल का नए तरीकों से सर्वेक्षण और जांच करने का आदेश दिया था। ASI की पांच वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेषज्ञ समिति ने पूरे सर्वेक्षण क्षेत्र की फोटोग्राफी की। उन्होंने बंद और सील कमरों को भी खोला ताकि वहां मिली कलाकृतियों और संरचनाओं की विशेषज्ञ टीम वैज्ञानिक तरीके से जांच कर सके। इसके बाद एक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई थी।
जल्द आएगा निष्कर्ष
ASI की रिपोर्ट दोनों पक्षों के वकीलों के साथ-साथ हिंदू और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधियों को भी दिखाई जानी थी। इस रिपोर्ट के निष्कर्षों से भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप और भविष्य के धार्मिक दर्जे को तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सभी की नजरें ASI की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।