15 अगस्त को आसमां में लहराएगा ग्वालियर में बना तिरंगा
ग्वालियर।
भारतीय स्वतंत्रता की 79वीं वर्षगांठ पर आसमान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे से भर जाएगा, मध्य प्रदेश के ग्वालियर ज़िले में तैयार किया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस पर किया जाने वाला ध्वजारोहण सभी को गौरव का अनुभव कराता है, लेकिन क्या आप राष्ट्रीय ध्वज बनाने की प्रक्रिया से परिचित हैं?
तिरंगे का ध्वजरोहण सबको गौरव का अनुभव करता है
गौरतलब है गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस तिरंगे का ध्वजरोहण ही सबको गौरव का अनुभव करता है और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा की शपथ दोहराता है. यही वजह रही कि स्वतंत्रता के पश्चात देश की संसद और संविधान ने इसे देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया.
बहुत कठिन है राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को बनाने की प्रक्रिया
देश की आन, बान और शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को बनाने की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है. राष्ट्रीय ध्वज संहिता में राष्ट्रीय ध्वज निर्माण की प्रक्रिया वर्णित है, जिसका निर्माण हर कोई नही कर सकता है. सरकार ने देश की दो संस्थाओं को ही इसके निर्माण का अधिकार दिया है, जो झंडे का निर्माण कर पूरे देश में सप्लाई करने के लिए अधिकृत है.
ग्वालियर की मध्य भारत खादी संघ बनाती है राष्ट्रीय ध्वज
राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के लिए जिन दो संस्थाएं अधिकृत हैं, उनमें ग्वालियर की मध्य भारत खादी संघ एक है. यह मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत की इकलौती संस्था है, जहां राष्ट्रीय ध्वज बनाए जाते है. स्वतंत्रता दिवस पर शासकीय और अशासकीय संस्थाओंं पर जितने भी ध्वजारोहण होते हैं, उनके लिए अधिकांश ध्वज ग्वालियर से ही बनकर जाते हैं.
उत्तर भारत में सिर्फ ग्वालियर में बनता है राष्ट्रीय ध्वज
संघ के संचालक अरुण सिंह तोमर कहते है कि ग्वालियर वासी ही नही, बल्कि पूरे एमपी के लोगों के लिए यह गर्व की बात है कि जहां भी ध्वजारोहण होना होता है, वहां ऑर्डर देने की प्रक्रिया के साथ ही ग्वालियर का जिक्र जरूर होता है. उन्होंने बताया कि ध्वज निर्माण में तय मानक का धागा तैयार करने से लेकर तिरंगे में डोरी लगाने तक का काम किया जाता है.

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